Archive for May, 2007

ब्लागिंग और पैसे देने वाला Google adsense

May 31, 2007

कई दिनों से मैं अपने ब्लागर मित्रों से कुछ कहना चाहता था लेकिन लग रहा था कि कैसे कहूं?

बात बड़ी साधारण है जो भी अपने ब्लाग में Google adsense गूगल एड सेंस का उपयोग करते हैं कम से कम उसकी प्लेसिंग पर ध्यान दें। मैं यह तो नहीं कह सकता कि आप एडसेंस को ही हटा दें। कई ब्लागर्स हैं जिनके ब्लाग में केवल एडसेंस ही एडसेंस नजर आते हैं। अगर आप यह सोचते हैं कि इससे लोग सभी पर क्लिक करने लगेंगे तो शायद आपको कोई गलतफहमी है। मेरा उनसे अनुरोध है कि इसकी प्लेसिंग पर जरूर ध्यान देंगे।

धन्‍यवाद
राजेश रोशन

अमिताभ को अब पता चलेगा कि.. जुर्म कैसे कम होता है

May 30, 2007

भारत के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर हैं अमिताभ बच्चन। यह वह शख्स है जो कुछ भी कहते हैं लोग उसे हाथों हाथ ले लेते हैं। कुछ महीने पहले भारतीय अखबार, टीवी, इंटरनेट पर अमिताभ के एक बयान की खूब चर्चा थी। जी हां!! यूपी में दम है..क्योंकि जुर्म यहां कम है।

अब इसी जुर्म को कम करने की कवायद फैजाबाद में चल रही है। मामला है हिन्दी फिल्मों के बेताज बादशाह अमिताभ बच्चन की एक ऐसी जमीन करने को लेकर जिसे केवल कोई किसान ही खरीद सकता था। सो क्या था गंगा के किनारे वाला छोरा फिल्मों में अभिनय करते करते सरकारी कागजों में भी किसान बन बैठा। जांच अब चल रही है।

इसकी शुरुआत हुई पुणो में फार्म हाउस बनाने के ख्वाब से। अभिषेक बच्चन पुणो में जहां फार्म हाउस बनाना चाहते थे, वहां की जमीन केवल किसान ही खरीद सकते थे। तो देरी किस बात की थी पहले यूपी में जमीन खरीद कर किसान बना और उस किसान वाली कागज को पुणो में जमीन खरीदने के वक्त लगा दिया गया। मीडिया में रिपोर्ट आ रही है उसके अनुसार बात यही है।

मेरा अपना अनुमान है कि अगर इस मामले में कोई जुर्म हुआ है तो बहन जी उसे खत्म करके ही छोड़ेंगी। फिलहाल मामला अदालत में है।

आप इससे जुड़ी हुई बीबीसी हिन्दी की एक रिपोर्ट देख सकते हैं

बड़ी फास्ट है यह इंटरनेट की दुनिया

May 29, 2007

मेक्सिको सिटी का समय भारत के समय से 11:30 घंटे पीछे है। वहां सोमवार देर रात और भारत में मंगलवार सुबह-सुबह खबर आई की मिस जापान ने चोला बदलकर मिस यूनिवर्स का चोला पहन लिया।

इंटरनेट के सारे ‘नवाबों’ ने अपना कंप्यूटर ऑन किया और लग गए काम में। मिस यूनिवर्स की घोषणा होने के एक घंटे बाद ही इंटरनेट के पांचों टॉप टीएलडी रजिस्टर हो गए।

मेरे पसंदीदा पोर्टल विकिपीडिया पर भी किसी ने रियो मोरी के नाम से पेज बनाया हुआ था जिसे गूगल ने अब तक 4 पेज रैंक दे दिया है।

मेरे एक कंप्यूटर जानने वाले दोस्त के अनुसार गूगल कहीं विकिपीडिया को भी न खरीद ले।

नोट: डॉट काम, डॉट नेट, डॉट ओआरजी, डॉट इंफो, डॉट आईएन ये सभी इंटरनेट टरमोनोलॉजी में टीएलडी कहलाते हैं।

हिन्दू धर्म क्या है: सेक्स या मुक्ति । क्या हम बात कर सकते हैं??

May 28, 2007

bloमेरे एक करीबी मित्र हैं जो भारत और भारत से जुड़ी अनेक चीजों पर बहुत गर्व करते हैं। मैं भी करता हूं..लेकिन सभी चीजों पर नहीं। खैर, मेरे उस दोस्त को विदेश की कुछ अगर पसंद है तो वह है वहां की फिल्में। जी सिनेमा नहीं जी एमजीएम देखता है। साथ ही स्टार मूवीज और एचबीओ। अब उसके पीछे उसकी मानसिकता मैं नहीं जानता या फिर मौन रहना चाहता हूं।

दोहे तो उसे खूब याद हैं, चौपाई भी। एक घंटे की बातचीत में रामायण, महाभारत के कई प्रसंग सुना देता है। धर्म की बात करने पर हिन्दू को सबसे पुराना धर्म बताते हुए एक श्लोक सुना देता है। बाकी धर्मो के बारे में.. नेक ख्याल तो नहीं रखता है।

हम दोनों सुबह-सुबह CNN पर एक प्रोग्राम देख रहे थे.. Anderson Cooper 360। उस स्पेशल प्रोग्राम में बात हो रही थी ‘ईसाईयत क्या है: सेक्स या मुक्ति।’ मैंने उससे कहा कि ‘हिन्दू धर्म क्या है: सेक्स या मुक्ति’। गुस्से में आकर मुझे ना जाने क्या-क्या बोल बैठा। मैंने कहा क्या मुझे यह प्रश्न पूछने का भी अधिकार नहीं है। उसने कहा तुम जानते क्या हो हिन्दू धर्म के बारे में। टीवी देखकर कुछ भी पूछ देते हो। तो मैंने कहा कि भगवान करे तो लीला और मैं करूं तो सेक्स और भोग।

सीएनएन के इन तीनों प्रोग्राम के स्क्रिप्ट आनलाइन हैं जो यहां देखे जा सकते हैं। क्लिक, क्लिक, क्लिक

मैं यह पूछता हूं कि क्या हमें धर्म के बारे में सीएनएन की रिपोर्ट की तरह नहीं बात करनी चाहिए। क्या पहले जो बातें लिखी गई हैं, उसी को सत्य मानते हुए उसकी पूजा करनी चाहिए। मैं विश्वासी हूं अंधविश्वासी नहीं। चाहे वो मामला धर्म से जुड़ा ही क्यों ना जुड़ा हो।

BCCI ka guru ghantal

May 28, 2007

BCCI cartoon

आप परेशान होने पर क्या करते हैं

May 26, 2007

क्या बोलूं यार बहुत परेशान हूं। मत पूछ.. क्या-क्या बताऊं। यार ये मेरे साथ ही क्यों होता है। बचपन से लेकर आज तक कभी मेरे साथ अच्छा नहीं हुआ है। :( :(

अब यह हैं सुनने वाले के जवाब-

क्या हुआ बता तो सही!!! वैसे हुआ क्या है!!! कोई बात नहीं सब ठीक हो जाएगा। अरे!! लोगों के साथ इससे भी बुरा हो रहा है।

आपने भी किसी से यह कहा होगा और अगर नहीं कहा होगा तो किसी ने आपसे ही कहा होगा।

हां!! एक बात और परेशानी सबके लिए अलग-अलग है। कोई है बच्चा पतंग ना मिलने पर परेशान हो जाता है तो कोई दसवीं के परीक्षा में तीन बार फेल होने के बाद इसलिए परेशान हो जाता है कि उसे परीक्षा के लिए निर्धारित तीन घंटे का समय पर्याप्त नहीं लगता है। कई लड़कियां इसलिए परेशान हैं कि उन्हें मैथ्स में 93 मार्क्‍स ही आए हैं (ये लड़कियां भी)।

इन सब बातों का पूर्वाग्रह तुलसी दास जी को बहुत पहले हो गया था और उन्होंने लिखा..

तुलसी या संसार में भांति-भांति के लोग॥

एक सर्वे के अनुसार सरकारी नौकरी करने वाले लोगों के ऊपर दबाव कम होता है। लेकिन जो लोग किसी निजी कंपनी में काम करते हैं उनपर काम का दबाव ज्यादा होता।

पत्रकारिता में तो दबाव कुछ ज्यादा ही होता है। अगर आपका बास अच्छा है फिर तो ठीक है नहीं तो पूरा आफिस अपने बास के बारे में जब भी बोलता है..’दिव्य वचन’ ही बोलता है।

क्या आप बता सकते हैं कि आप परेशान होते हैं तो क्या करते हैं? या कोई परेशान है तो उसे क्या कहेंगे?

Life in a METRO, दौड़ते-भागते शहर की कहानी

May 25, 2007

फ्लैट की चाबी मांगना, मेट्रीमोनियल वेबसाइट पर लड़कियां देखना, प्रोमोशन के लिए बॉस के आगे-पीछे घूमना, ट्रेन-बस में किसी अंजाने से मुलाकात और फिर दोस्ती हो जाना। यह सब कुछ हर रोज आजकल भारत के कोस्मोपोलिटन शहरों में हो रहा है। यह हमारे बदलते समाज की कहानी है। अंग्रेजी में इसे ट्रांजिशन फेज कहते हैं।

मुझे मुंबई के बारे में बहुत आइडिया नहीं है लेकिन जो लोग दिल्ली के नार्थ कैंपस इलाके की जीवन शैली को जानते हैं उन्हें कम से कम अनुमान होगा कि ऐसा सचमुच में होता है। रात को देर रात तक पार्क में घूमना। देर रात तक किसी दूसरे के कमरे का उपयोग करना।

अनुराग बसु का निर्देशन और प्रीतम का संगीत बेहतरीन है। सभी किरदारों ने अपने किरदार के साथ पूरी ईमानदारी बरती है। इरफान खान और कोंकणा सेन ने बेहतरीन काम किया है। शरमन जोशी में थोड़ी परिपक्वता दिखी है। धमेंद्र और नफीसा अली की जोड़ी अच्छी थी।

ओवरसीज में शिल्पा शेट्टी के नाम पर फिल्म जरूर चल रही है। भावनाओं के ताने-बाने पर बुनी और भारत के बड़े शहरों की जिंदगी को चित्रित करती फिल्म मेट्रो अच्छी बनी है।

कल बड़े दिनों बाद मैं थिटेटर में जाकर फिल्म देख पाया।

खरगोश और कछुआ की कहानी: संप्रग के तीन साल पूरे

May 23, 2007

UPA GOV 3 years completed 

क्या मजेदार काटरून है। सही बनाया है राजेंद्र जी ने। राजनीति और अर्थशास्त्र दोनों साथ में बंधे हुए हैं..यह तो बड़ी विडंबना है। मैंने इन दो दिनों में चाटुकार पत्रकारिता की कुछ मिसाल देखी हैं। संप्रग के तीन साल पूरे होने पर विभिन्न अखबारों ने अलग-अलग हेडिंग लगाई थी। अगर आपके पास कुछ अखबार हो तो देख लें..। आपको भी पता चला जाएगा। और फिर भी ना समझ आए तो उनके संपादकीय पृष्ठ को जरा पढ़ लें।

‘परवीन तू है बड़ी नमकीन’: पाक का एक विवादित गाना

May 23, 2007

भाई मैंने गाना सुना है, बड़ा मस्त गाना है। लेकिन परवीन को कहना भी अपनी जगह सही है। अबरारुल हक का कहना भी अपनी जगह सही है। खैर बात अब पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में है। यूट्यूब के इस विडियो में को देख कर भी समझ जाएंगे कि विवाद आखिर कैसे उठा। आपके पास अगर स्पीकर/ईयर फोन हो तो गाना सुनिए और मस्त रहिए।

इसपर बीबीसी की यह रिपोर्ट

‘परवीन तू है बड़ी नमकीन’: पाक का एक विवादित गाना

May 23, 2007

भाई मैंने गाना सुना है, बड़ा मस्त गाना है। लेकिन परवीन को कहना भी अपनी जगह सही है। अबरारुल हक का कहना भी अपनी जगह सही है। खैर बात अब पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में है। यूट्यूब के इस विडियो में को देख कर भी समझ जाएंगे कि विवाद आखिर कैसे उठा। आपके पास अगर स्पीकर/ईयर फोन हो तो गाना सुनिए और मस्त रहिए।

इसपर बीबीसी की यह रिपोर्ट