सुबह अपने मोबाइल पर ही फ्म सुन रह था । गाने के बाद एक विगयापन ने धयान खींचा । देल्ही सरकार कि ओर से जनहित में जारी । विज्ञापन था बाल मजदूरी को लेकर ।
तो आपने कभी इस नंबर पर फ़ोन किया है ? ऐसा नही हो सकता कि आपने किसी बाल मजदूर को नही देखा होगा !!! एक मिनट के लिए उन बाल मजदूरों के बारे में सोचिये । ये नंबर पुरे भारत के लिए है । 365 * 7 * 24 । 14 या 14 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे से किसी भी तरीके का व्यवसायिक काम कराना कानून के नजर में अपराध है ।
रघु सुबह-सुबह उठाता है । स्कूल जाने के लिए नही । रात के बचे बरतन को धोने के लिए । रघु मयूर विहार के एक ढाबे में काम करता है । कोई उसे अबे ! तो कोई अरे ! तो कोई छोटू कह कर बुलाता है । लाल रंग पर काली धारी वाली उसकी कमीज उसके वर्तमान कि तरह काली होने लगी है । उसके क़द-काठी से दोगुनी बड़ी कमीज को वो नीचे से मोड़ कर पहनता है । जिस साहब ने उसे वो कमीज दी थी उसे रघु आज भी सलाम करना नही भूलता । भले ही वो इसलिये दी गई थी क्योंकि साहब जी के मैडम का मन उस कमीज से उकता गया था ।रोज नहाने पर मालिक उसे गाली देते हुए कहता है कि साला !! रोज नहाता है । और एक दिन भी नही नहाने पर गंदे होने के लिए गाली सुननी पड़ती है ।ऐसे ढेरो रघु हमारे आपके आमने-सामने हैं । क्या हम उनके लिए कुछ कर सकते हैं ? क्या आप कुछ कर सकते हैं ? हां !! तो 1098 पर फ़ोन कीजिये । काम हो जाएगा ।
Desh mein baal majdooro ko bachane ke liye Bachpan Bachao Andolan chal raha hai. Pure vishwa mein baal majdooro ki sankhya 10 crore ke lagbhag hai . Jo kisi bhi desh ki tulna mein sabse jayada hai.

मई 6, 2007 को 6:52 पूर्वाह्न पर |
abhi tak to nahi kiya.lekin ab jaroor kaunga
जून 13, 2007 को 7:55 पूर्वाह्न पर |
[...] कुछ दिन पहले मैंने एक पोस्ट लिखी थी, क्या आपने कभी 1098 पर फोन किया है? अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन हर साल के 12 [...]
अक्टूबर 14, 2011 को 11:30 पूर्वाह्न पर |
हर साल बाल दिवस मनाया जाता है , सम्मेलन किए जाते हैं , योजनाएँ बनाईं जाती हैं , बज़ट तैयार किया जाता है, नई-नई शिक्षा पद्धति लागू की जाती है , कागज रंगे जाते हैं फ़िर भी दुनिया में सबसे अधिक बाल मजदूर हमारे देश में हैं–कैसा बचपन कैसा देश….!
अक्टूबर 14, 2011 को 11:34 पूर्वाह्न पर |
हर साल बाल दिवस मनाया जाता है , सम्मेलन किए जाते हैं , योजनाएँ बनाईं जाती हैं , बज़ट तैयार किया जाता है, नई-नई शिक्षा पद्धति लागू की जाती है , कागज रंगे जाते हैं फ़िर भी दुनिया में सबसे अधिक बाल मजदूर हमारे देश में हैं–कैसा बचपन कैसा देश….!