क्या आपने कभी 1098 पर फ़ोन किया है?

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Child labor

सुबह अपने मोबाइल पर ही फ्म सुन रह थागाने के बाद एक विगयापन ने धयान खींचा ।  देल्ही सरकार कि ओर से जनहित में जारीविज्ञापन था बाल मजदूरी को लेकर
तो आपने कभी इस नंबर पर फ़ोन किया है ? ऐसा नही हो सकता कि आपने किसी बाल मजदूर को नही देखा होगा !!! एक मिनट के लिए उन बाल मजदूरों के बारे में सोचिये ।  ये नंबर पुरे भारत के लिए है । 365 * 7 * 24 । 14 या 14 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे से किसी भी तरीके का व्यवसायिक काम कराना कानून के नजर में अपराध है

रघु सुबह-सुबह उठाता हैस्कूल जाने के लिए नहीरात के बचे बरतन को धोने के लिएरघु मयूर विहार के एक ढाबे में काम करता हैकोई उसे अबे ! तो कोई अरे ! तो कोई छोटू कह कर बुलाता हैलाल रंग पर काली धारी वाली उसकी कमीज उसके वर्तमान कि तरह काली होने लगी हैउसके क़द-काठी से दोगुनी बड़ी कमीज को वो नीचे से मोड़ कर पहनता हैजिस साहब ने उसे वो कमीज दी थी उसे रघु आज भी सलाम करना नही भूलताभले ही वो इसलिये दी गई थी क्योंकि साहब जी के मैडम का मन उस कमीज से उकता गया थारोज नहाने पर मालिक उसे गाली देते हुए कहता है कि साला !! रोज नहाता हैऔर एक दिन भी नही नहाने पर गंदे होने के लिए गाली सुननी पड़ती हैऐसे ढेरो रघु हमारे आपके आमने-सामने हैंक्या हम उनके लिए कुछ कर सकते हैं ? क्या आप कुछ कर सकते हैं ? हां !! तो 1098 पर फ़ोन कीजियेकाम हो जाएगा

 Desh mein baal majdooro ko bachane ke liye Bachpan Bachao Andolan chal raha hai. Pure vishwa mein baal majdooro ki sankhya 10 crore ke lagbhag hai . Jo kisi bhi desh ki tulna mein sabse jayada hai.

4 Responses to “क्या आपने कभी 1098 पर फ़ोन किया है?”

  1. jay Says:

    abhi tak to nahi kiya.lekin ab jaroor kaunga

  2. बाल मजदूरी: भयावह भविष्य, कुछ चित्र « My Dream Says:

    [...] कुछ दिन पहले मैंने एक पोस्ट लिखी थी, क्या आपने कभी 1098 पर फोन किया है? अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन हर साल के 12 [...]

  3. Deepak Kumar Says:

    हर साल बाल दिवस मनाया जाता है , सम्मेलन किए जाते हैं , योजनाएँ बनाईं जाती हैं , बज़ट तैयार किया जाता है, नई-नई शिक्षा पद्धति लागू की जाती है , कागज रंगे जाते हैं फ़िर भी दुनिया में सबसे अधिक बाल मजदूर हमारे देश में हैं–कैसा बचपन कैसा देश….!

  4. Deepak Kumar Says:

    हर साल बाल दिवस मनाया जाता है , सम्मेलन किए जाते हैं , योजनाएँ बनाईं जाती हैं , बज़ट तैयार किया जाता है, नई-नई शिक्षा पद्धति लागू की जाती है , कागज रंगे जाते हैं फ़िर भी दुनिया में सबसे अधिक बाल मजदूर हमारे देश में हैं–कैसा बचपन कैसा देश….!

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