जरा याद करो कुर्बानी !!!

सुबह अखबार खोला ।  एक कागज (पंप्लेट) मिलानौएडा में एक कंप्यूटर संस्थान खुला हैकागज में ऊपर लिखा था फ्री  । और नीच लिखा था केवल सेवा चार्ज देय . संस्थान का नामलाल बहादुर शास्त्री कंप्यूटर संस्थान

राजनेतावो के नाम पर ऐसे ही कई संस्थान खुलते हैं और बंद भी हो जाते हैंमूर्तियों के बारे में नही कहूँगा क्योंकि आप बहता समझ सकते हैं कि शांति के दूत कबूतर …..क्या करते हैं !!!

न्द्त्व इंडिया और हिंदुस्तान को छोड़ दे तो किसी भी मीडिया ने संग्राम के १५०वि वर्षगाठ को ताव्व्जो नही दी

अब दूसरी बात । आज ही मेरठ से १८५७ के संग्राम के १५० साल पूरे होने पर होने एक मार्च का आयोजन किया गया । जिसमे देश भर के १०००० युवा भाग ले रहे हैं । ११ तारीख को यह मार्च देल्ही में आकर ख़त्म होगा । यहा राष्ट्रपति कलाम के साथ उप-राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत, लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी और कॉंग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गाँधी युवाओ को संबोधित करेंगी

इस देश के साथ एक बड़ी विडम्बना हैमैंने कई लोगो से सुना है की यार !! जैसा देश भारत है ना वैसा और कोई देश नही हैना ही हो सकता हैयहा की संस्कृति, यहा ke विचार, यहा के लोग, यहा तक की हमारे देश का जो मानचित्र है वो भी सबसे बेहतर हैमैं भी कहा करता थालेकिन अब मुझे ये मानचित्र के बारे में कहना कुछ समझ नही आताखैर ये बाते तो बाद में ….

गंधिगिरी karte मुन्ना ने कहा था की इनको (नेताओ और क्रांतिकारियों) को कही रखना है तो अपने दिल में रखो . उनके नाम पर संस्थान बनाना , मूर्ति का अनावरण करनाये सब होना चाहिऐ ।  और अगर बने तो उनका उसी सम्मान से रख रखाव करना चाहिऐ ।  हमारे देश का इतिहास बड़ा गौरवपूर्ण रहा है ।  हमारे देश के क्रांतिकारियों और नेतावो ने पूरे विश्व को एक नै दिशा दीवो अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते हैं, रहेंगेहम देश वाशियो को भी उनकी तरह बहादुर और इमानदार होना चाहिऐक्योंकि जरा याद करो उनकी कुर्बानीमेरे और पूरे चिटठा जगत की ओर से सभी सहीदो को शत-शत नमन

BBC hindi ki report aur kuch rekhachitr

4 Responses to “जरा याद करो कुर्बानी !!!”

  1. gaurav Says:

    naman!

  2. समीर लाल Says:

    शत-शत नमन!

  3. मनीष Says:

    aapki bhavnayein kadra karne yogya hain. Un veer sapooton ko meri tarf se bhi sridhdhanjali

  4. sunita(shanoio) Says:

    सभी शहिद जवानो को मेरा शत-शत नमन

Leave a Reply