खुशी लोगों के पास कम देर रहती है। आती भी है तो चली जाती है। लेकिन दुख हमेशा रहता है। खुशी के मौके पर चिंता व कष्ट बना रहता है। लेकिन जिंदगी चलने का नाम है..। यह चलती रहती है, अपनी चाल से..। चाहे सुख हो या दुख। आपको पता भी नहीं चलेगा।
क्या आपको याद आता है कि आपने कब दसवीं पास की थी? क्या आपको याद आता है कि आपने कब नौकरी ज्वाइन की थी? क्या आपको याद आता है कि आपने चिट्ठा लिखना कब शुरू किया है? क्या आपके बचपन के शौक और अब के शौक में बदलाव आ गया है? यह कुछ ऐसे प्रश्न हैं जो आपको खुशी दे सकते हैं।
मेरी अपनी समझ कहती है कि जीवन में आपने ‘संभावना और संघर्ष’ से दोस्ती की है तो आप कुछ भी कर सकते हैं। हर जंग जीत सकते हैं। अगर आप दुख से हार कर बैठ गए तो आपके हाथ कुछ हासिल नहीं होगा। कुछ भी नहीं। कोशिश करें हौसला ना खोएं और योजना के साथ आऐ बढ़े।
परिस्थिति चाहे कोई भी हो संभावना उससे उबरने की जरूर होती है। और संघर्ष आपको जीत दिला देती है।
मैंने यह चिट्ठा अपने एक दोस्त के कहने पर लिखा है। आशा है कि वह इसे पढ़कर कुछ समझ पाए।
धन्यवाद॥
राजेश रोशन
May 15, 2007 at 6:11 pm |
इस संसार में दु:ख जैसा कुछ है भी नहीं सब मात्र सपना है जो आता दिखता जरूर है मगर चला जाता है…। जो कष्ट है वह मात्र विकास का साधन है जो परम पावन है…। लेख आच्छा लिखा है… गहरी बाते हैं…।
May 16, 2007 at 6:36 am |
it’s gr8. dil tak pahunchti hai. sach purani baten kafi khushi de jati hain. kabhi kabhi akele men un palon ko yaad karte hue kab hothon par mushkuraht aa jati hai pata hi nahi chalta.
aur is duniya me kaun aisa hai jiski dosti sambhawna & sangharsh se nahi hogi. han ye alag bat hai ki kuch aage badhte jate hain aur kuch haar man kr beech raste men hi dam tod dete hain. waise Rajeshji aapne kafi achcha likha hai wo bhi blkl emotion k sath. aise hi likhte rahiye. aur haar na mante hue aage badhte rahiye.