क्या पढ़े, क्या देखे? इंफोरमेशन ओवरलोड का जमाना है
स्कूल से लेकर काम करने तक। पढ़ाई, पढ़ाई और पढ़ाई। अब तो बच्चा बोलना शुरू करता है तो उसकी मम्मी ए, बी, सी पढ़ाना शुरू कर देती हैं। बेटा यह क्या है? नोज बोलो नोज। यह ईयर, यह आई, टीथ, चीक..बच्चे को पारंगत बनाने की पूरी तैयारी चलती होती है। इसके पीछे का कारण जानिए।
जब अपार्टमेंट में रहने वाली सारी महिलाएं मिलती हैं तो सभी को अपने बच्चे के बारे में बताना होता है कि चिंटू तो अब ऐसे जवाब देता है कि पूछिए मत !!! विक्की के तो इस बार अंग्रेजी में नाइंटी फाइव मार्क्स आए हैं। मेरी सोनू तो स्कूल से आने के बाद सबसे पहले अपना होमवर्क बना लेती है। और ना जाने क्या..क्या..।
हर कोई दूसरे की बात काट कर अपनी बात बताना चाहता है। सुनने वाले कम हो गए हैं। बनाने वाले ने मुंह एक और कान दो बनाए हैं ऐसे तर्को में लोग फंसना नहीं चाहते।
किसी अंजान से चैटिंग करो तो वहां आपको कम सुनने के लिए मिलेगा। मेरे साथ भी यही हुआ। मैं भी सीमा जी से चैंटिंग कर रहा था। उन्होंने पूछा आप क्या करते हैं। मैंने विकिपीडिया का अपना यूजर लिंक दे दिया। उसके बाद उन्होंने कुछ पूछा जिसका जवाब मैंने दिया। और मैंने लिखा Need to explore more । सीमा जी ने aadmi kya kya explore kare? waise bhi इंफोरमेशन ओवरलोड का जमाना है!!! मैने सोचा भई बात तो सही है लेकिन हमें क्या पढ़ना चाहिए से ज्यादा जरूरी है कि हमें क्या नहीं पढ़ना चाहिए।
इंटरनेट पर सवार हम ‘नवाब’ क्या देखते हैं। इसकी एक बानगी मैंने हमें मस्ती और सेक्स चाहिए पोस्ट में की थी। हम जो भी करते हैं उसके लिए जिम्मेवार भी हम ही हैं।
May 16, 2007 at 12:44 pm
आप सही सोचवाया .. अब मैं यह तय करूँगा कि आप को आगे से पढ़ा जाय कि नहीं..
May 16, 2007 at 2:00 pm
तय तो हमें ही करना है, बिल्कुल सही कह रहे हैं.
May 16, 2007 at 3:27 pm
बिल्कुल सच कहा अब तो तय कराना ही है…।
May 16, 2007 at 7:27 pm
सच कहा है आपने।