इस किरदार ने भारतीय घरों में बहुत कुछ बदला है। लोगों के रात के खाने का समय बदल दिया था इस सीरियल ने या यूं कहें इस किरदार ने। पत्नी पति से कहती है एक बार सीरियल खत्म हो जाये फिर खाना बाना देती हू
भारतीय टेलीविजन इतिहास की पहली फैशनेबल बहु ‘तुलसी’ का आज अंतिम दिन होगा। अगर मैं गलत नहीं हूं तो इससे पहले ‘स्वाभिमान’ ही एक ऐसा सीरियल था जिसमें ग्लैमर दिखता था और उसमें अंजू महेंद्रु का किरदार ग्लैमरस किरदार में दिखती थी।
खैर, ‘क्योंकि सास भी कभी बहु थी’ की सबसे पुरानी किरदार तुलसी विरानी। आज के प्रोग्राम में एक दुर्घटना में तुलसी की मौत हो जाती है।
कई शादी-शुदा पुरुष तुलसी को सबसे बड़ी विलेन मानते हैं। आखिर उसने ड्राइंग रूम से निकलकर उसके बेडरूम तक की दुनिया को बदला है। आज हर घर में ड्राइंग रूम में और बेड रूम में टीवी जो होता है।
एकता कपूर का इसके बाद घर-घर में नाम हो गया है। वो अलग की बात है कि ऑरकूट में I hate Ekta Kapoor नाम से भी एक कम्यूनिटी बनाई गई है। लेकिन वो एक गाना है ना.. ‘जब से मैं थोड़ा सा बदनाम हो गया, यार मेरा बड़ा नाम हो गया’।
वैसे मेरा अपना मानना है कि जिस तराजू पर टीवी धारावाहिकों को तौला जाता है, यह सब उसी का खेल है। टीआरपी ही तुलसी को मरवा रहा है और मुझे कोई ताज्जुब नहीं होगा जब यही टीआरपी तुलसी को जिंदा भी कर दे।
हां!!! जिस किसी को भी इसके बारे में पता चल रहा है सब अपने-अपने एक्सपर्ट कमेंट दे रहे हैं आपका क्या कमेंट है?
माफ किजिएगा अगर किसी को यह शीर्षक बुरी लगी तो। मैं उनसे निजी रूप से माफी मांगने को तैयार हूं। अपना फोन न यो मेल आई डी बता दें।

June 6, 2007 at 9:03 am
इत्ते खुश ना हो….
मर तो स्मृति माई रही है, अगले ही दिन कोई कोल्हापुरे, अग्निहोत्री वगेरे माईयों मेसे कोई भी तुलसी का बाना ओढ़ आपको सताने आने वाली है. एकता का अत्याचार यूँ खत्म ना होगा…..
June 6, 2007 at 11:30 am
bhai sahab tumlsi ka marna bahut jaruri tha.
lekin mujhe dar hai ki isse samasya or na badh jaye.
kyonki tulsi to mar jaegi lekin apne piche kuch aise raj chod jaegi
jise janne ke liye log or jyada na chipak jaye.
June 6, 2007 at 12:37 pm
अरे भाई लोग लगता है आप लोग आज तक और स्टार टी वी न्यूज़ चंनल नही देखते है वरना तुलसी के मरने पर इतने खुश नही होते, न्यूज़ मे दिखाया गया है कि अब तुलसी का किरदार अब स्मृति की जगह गौतमी निभाएँगी । इस लिए तैयार रहिए।
June 7, 2007 at 3:03 am
अरे भाई , मर ही नहीं सकती ,उसके पास एकता जैसी संजीवनी बूटी जो है , फ़िर से जिन्दा हो जायेगी
June 8, 2007 at 8:02 am
thank god apke mooh mein ghi aur shakker