मैं ऐसा मान नहीं सकता कि आप लोग रजनीकांत को ना जानते हों। वह देश के सबसे बड़े एक्शन हीरो हैं। उनके कई एक्शन की कापी देश के अन्य फिल्मों में ही नहीं विदेशी फिल्मों में भी बराबर होती है।
रजनीकांत सिगरेट भी पीते हैं तो रिवाल्वर से। उनके फाइटिंग सीन तो लाजवाब है। आप यूट्यूब के इस विडियो को देख लें।
‘शिवाजी’ भारत की सबसे महंगी फिल्म है और रजनीकांत सबसे महंगे हीरो। इस फिल्म के लिए रजनीकांत ने 19 करोड़ रुपये लिए हैं। फिल्म के निर्देशक हैं शंकर जिन्हें दक्षिण भारत का स्टीवन स्पीलबर्ग भी कहा जाता है। संगीत एआर रहमान का। इस फिल्म ने रीलीज होने से पहले ही कितने रिकार्ड बना दिए हैं। रिकार्ड की ज्यादा जानकारी बीसीसी के इस रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं।
अफसोस मुझे केवल एक बात का है कि मुझे ना तो तमिल आती है ना ही तेलगू। काश!! मैं भी तमिल या तेलगू समझ पाता।
मुझे एक और विडियो मिल गई इसके एक्शन पचा पाना मुश्किल है लेकिन यह रजनीकांत है, जिसके लिए सबकुछ संभव है। इसे भी देख लीजिए।
Rajinikant Page over Wikipedia
June 15, 2007 at 11:01 am |
अगर कहें कि अमिताभ उत्तर के रजनीकांत हैं तो ठीक रहेगा या यह कि रजनीकांत दक्षिण के अमिताभ हैं?
June 15, 2007 at 11:08 am |
Aaj hi Rajnikant ne kaha hai, I am the King but Big B is Emperor.
June 15, 2007 at 11:17 am |
रजनीकान्त की स्टाईल का कोई जवाब नहीं है, fan following में अमिताभ उनके आगे कहीं नहीं ठहरते हैं, वैसे भी उत्तर भारत में हीरो-हीरोइन के लिये जान देने को कोई तैयार नहीं होता, जबकि दक्षिण में जयललिता को कई लोग आज भी एमजी रामचन्द्रन की पत्नी समझते हैं और आत्मदाह करते हैं, दरअसल दक्षिण में सितारे आम जनता से जुडे हुए हैं और लगातार समाजसेवा में लगे रहते हैं सादा जीवन जीते हैं, उत्तर भारत की बात अलग है… इसलिये क्या रजनीकान्त, क्या चिरंजीवी, क्या ममूटी सभी एक से बढकर एक हैं और सबसे ऊपर हैं रजनीकान्त…
June 15, 2007 at 11:26 am |
रजनीकांत ने इस फिल्म के लिए केवल १००० रुपय लिए हैं बाकि उनकी प्रौफिट में हिस्सेदारी है, एसा हमने सुना और पढा है
June 15, 2007 at 2:04 pm |
भाई साहब हम रजनीकांत को जानते पहचानते और प्यार भी करते हैं । रजनीकांत ने सिनेमा में क्या क्रांति की है सुनिए । आज शुक्रवार को रजनी की नई फिल्म शिवाजी दुनिया भर में रिलीज़ हो रही है तमिल में । बिना किसी सब टाईटल के साथ । अनगिनत प्रिंट हैं । एडवांस बुकिंग के नए रिकॉर्ड बन गये हैं । मुंबई में तो शायद एक ही सिनेमाघर इसे प्रदर्शित कर रहा है । मुद्दा ये है कि रजनी वन मैन इंडस्ट्री हैं । अगर रूस या जापान या यूरोप अमरीका के भारतीय मूल के लोग रजनी की फिल्मों का इतनी बेसब्री से इंतज़ार करते हैं तो ये क्रांति ही है । फिल्मों के प्रति इस पागलपन का सामाजिक अध्ययन किया जाना चाहिये । ऐसा जुनून तो शाहरूख और बच्चन साहब के लिए भी नहीं होता । क्यों ।
June 15, 2007 at 8:22 pm |
मुझे ये सोचकर हँसी आती है कि असल में तो रजनीकाँत इन सब लड़ाई के दृष्यों की शूटिंग में बेफ़कूफ़ों की तरह टाँग इधर उधर उठा कर खड़े रहे होंगे, असली एक्शन को कैमरामैन, एडीटरों आदि का है।
June 18, 2007 at 10:36 am |
[...] मैंने 15 जून को एक पोस्ट लिखी ‘शिवाजी‘ फिल्म के ऊपर और आज क्या देखता हूं कि [...]
June 25, 2007 at 12:39 pm |
आपका चिठ्ठा लिखा. काफी अच्छा है. हिंदी भाषी दर्शक अभी तो रजनीकांत की लोकप्रियता से वाकिफ हो रहे है. उनकी इस लोकप्रियता का विश्लेषण होना अभी तो दूर की कौडी दिखाई देती है. वैसे इस बारे में मैने लिखा हुआ एक चिठ्ठा जिज्ञासुऒं को शायद मार्गदर्शन करे.
देविदास देशपांडे
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