भाईचारा बढ़ाइए: लिंक एक्सचेंज करिए
इसका खास उद्देश्य है भाईचारा को बढ़ावा देना। इधर वैसे भी माहौल गर्म है तो मैंने सोचा कि क्यों ना कोई तरकीब सोची जाएं। तो ऐसा करते हैं मैं अपने ब्लागरोल में आप सभी टिप्पणी देने वाले लोगों के ब्लाग को अपने में जोड़ दूंगा। क्या पता शायद इसी से कुछ सुधर जाए।
वैसे यह बात जरूर है कि कई बार ब्लागरोल लिंक होते हुए भी विचार नहीं मिलते इसके लिए कोई आइडिया तो आप भी सोच सकते हैं। उद्देश्य है सभी के बीच शांति फैलाना। मेरा डोमेन आप जोड़े और मैं आपका।
June 18, 2007 at 9:35 am
no comments please
ur writing is to good
June 18, 2007 at 9:37 am
लिंक Xचेंज पर पहले भी विचार किया गया था पर इससे अंतत: ब्लॉग बहुत लंबा होकर अपना महत्व खो देता है- टेक्नारॉटी लाभ भले ही हो जाए कुछ।
June 18, 2007 at 9:37 am
ब्लॉग के स्थान पर ब्लॉग रोल पढ़ें
June 18, 2007 at 10:33 am
जैसा मैंने कहा था, उसके मुताबिक मसिजीवी जी आपका ब्लोग मैंने अपने ब्लोग रोल में जोड़ लिया है. और अमर जी आपका चुंकि कोई ब्लोग नही है इसलिये आपको कमेंट देने के लिए धन्यवाद
June 18, 2007 at 10:45 am
लिंक जोड लेने से मन नही जुडा करते भाई पर इतना तो है एक दुसरे का चिठ्ठा सीधे एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाता है । इस विकट संकट के संबंध मे देवलोक के देवो ने अपने अपने ढंग से कथा व्यथा बखानी है । अब भगवान विष्णु ही कृपा करने वाले है उसी का इंतजार करें और लिखते रहे, लिखते रहे । अब कोई ये मत पूछ देना कि ये भगवान विष्णु कौन है ?
June 18, 2007 at 11:01 am
संजीव जी मुझे नही पता कि आपको छोटी बातो में खुस होना आता है या नही लेकिन मैं तो हर छोटी बात पर भी खुश हो जाता हु। आप भी कोशिश करके देखे। वैसे आपका भी ब्लोग मेरे ब्लोग रोल कि शोभा बढ़ा रहा है । कमेंट देने के लिए धन्यवाद ।
June 18, 2007 at 11:26 am
लालच दे कर कोमेंट लेना क्या अच्छी बात है
सुझाव अच्छा है.
June 18, 2007 at 11:33 am
लालच अगर नुकसान ना दे तो उसे अपना लेना चाहिऐ । Am i right Sanjay ji?
ur blog also added on my blog roll.
June 18, 2007 at 11:56 am
अच्छा आइडिया है, लिंक-प्रथा से कल्याण होता है।
June 18, 2007 at 12:19 pm
Shrish ji aap late ho gaye, ab maine blogroll mein add karne ki jagah nahi hai.
Are nahi bhai aap logo ke liye jagah nahi hogi to dusra blog khol denge lekin add to jaroor karenge.
Thanks
June 18, 2007 at 4:14 pm
हा हा, राजेश भाई ब्लॉगरोल में जगह पाने के लिए ही टिप्पणी नहीं की। मैं तो लिंक प्रथा का बहुत पहले से समर्थक हूँ। हाँ मैंने ब्लॉगरोल तो केवल रमण कौल जी द्वारा बनाई ‘ब्लॉगर सूची ‘ ही लगा रखा है लेकिन मैं अपनी पोस्टों में तमाम चिट्ठों और चिट्ठाकारों जिनका जिक्र आए, लिंक देता हूँ। लिंक प्रथा से गूगल पेज रैंक और टैक्नोराती रैंक दोनों में लाभ होता है।
June 18, 2007 at 11:04 pm
लो भाई, हम भी ललचा ही गये.
June 19, 2007 at 7:22 am
वा वा, काहे ऐसन लालच देवत हौ भैय्या!
June 23, 2007 at 10:15 am
le lijiye roshan sahab hum bhi aahi gaye