नारद, गूगल, विवाद, इस्तीफा और भी ना जाने कई..
जब भी आप बच्चे से पूछो कि आप क्या बनना चाहते हैं तो बेटा, पहले तो बोलेगा नहीं और अगर बोलेगा तो पुलिस, इंजीनियर, डाक्टर, पायलट से बाहर बोल ही नहीं पाएगा। यहीं तक उसकी समझ है।
मुझसे भी कई बार पूछा जाता था कि मैं क्या बनना चाहता था मैं तो बोल ही नहीं पाता था। अंजान लोगों को नहीं बता पाता था। मां पूछती थीं, तो बोलता था पुलिस।
अब पत्रकार हूं। पढ़ने-लिखने की आदत ने पत्रकार बना दिया नहीं तो हम भी शायद..।
अरे! मैं यह क्या लिख रहा हूं? मैंने शीर्षक तो कुछ और लगाया है इससे मिलता तो मैं कुछ लिख नहीं रहा फिर इस शीर्षक का मतलब! है मतलब, बताता हूं। कंप्यूटर जानकार इसे एसईओ कहते हैं, सर्च इंजन आपटिमाइजेशन।
यह जो मैंने शीर्षक में शब्द लगाए हैं यह नारद के पोपुलर हेडिंग कीवर्ड हैं। नारद, विवाद, गूगल, गूगल देव, प्रकरण, इस्तीफा व अन्य। केवल कल ही ना जाने कितने लोगों ने अपने शीर्षक में नारद शब्द का शीर्षक में प्रयोग किया था। आप कुछ भी लिखिए शीर्षक में इन शब्दों का इस्तेमाल होना चाहिए। मेरी गणना के अनुसार आपको कम से कम 20 क्लिक तो मिल ही जाएंगे।
एक ब्लोगर है नीरज राजपूत अच्छा लिखता है लेकिन उसे कोई नहीं पढ़ता। हां, कभी कभार राजीव रंजन जी पढ़ते हैं और टिप्पणी भी करते हैं।
तो भाइयों मैं कहना चाहता हूं कि आप बड़े नामों से ऊपर उठे नए चिट्ठेकारों की हौसला आफजाई करें। शीर्षक पर ना जाएं। कूड़ा भी मिल सकता है जैसे यहां मिला। बात समझ में आ गई ना।
वैसे एक बात और बता दूं। ‘नारद’ और ‘नारद विवाद’ दोनों कीवर्ड मुझे गूगल में टाप फाइव में जगह देता है। ना विश्वास हो तो सर्च कर लें।
June 19, 2007 at 7:43 am
मजेदार. मैने गूगल सर्च किया और सही पाया!
वैसे मैं टॉपिक देख कर नहीं आया. आपने लिंक दिया था मेरी पोस्ट पर, सो आया!
सर्च इंजन आपटिमाइजेशन की बजाय हिन्दी में सस्टेंड लेखन काम का लगता है.
And you got to read and observe widely for getting sustained clicks. Which I am sure you do.
Not many are using search engine for Hindi.
Please give me URL of Neeraj Rajpoot.
June 19, 2007 at 8:13 am
वाह बहुत अच्छी बात ।
June 19, 2007 at 8:17 am
एक संजय बेंगाणी हुआ करता था, जो नए ब्लोगरो को कोमेंट कर प्रोत्साहित किया करता है, अब गालियाँ खा कर यह काम बन्द कर दिया.
भई बहुत खुब लिखा है. समझदार लोग अभी भी लिख रहे है, जानकार प्रसन्नता हुई. बधाई.
June 19, 2007 at 8:23 am
सत्य!!
नीरज राजपूत का लिंक किधर है भाया?
June 19, 2007 at 8:42 am
मैंने नीरज राजपूत जी और राजीव रंजन जी का ब्लोग पोस्ट में अदद कर दिया है। वह क्लिक कर चेक कर सकते हैं ।
June 19, 2007 at 9:09 am
नारद जी अब हम टिपियाने मे भी आपका ही नाम लेकर शुरु करेगे,ताक्की टोप पर हम भी आ जाये
June 19, 2007 at 10:20 am
रोशन साहब, इसको Search Engine Optimisation नहीं कहते वरन् Search Engine Manipulation कहते हैं जिसके लिए पकड़े जाने पर गूगल स्थायी बैन लगाता है!
June 19, 2007 at 10:43 am
माना अमित जी की आप इन्टरनेट और कंप्यूटर को ज्यादा जानते हैं लेकिन मैं एक बात जानता हु गूगल का spyder भी लोगो की मंशा देखता है। वैसे भी फ़िलहाल कई keywords मेरे ब्लोग को टॉप 10 में जगह दे रहे हैं । सो मैं खुश हु जब नही देते थे तब भी खुश था । सो मुझे कोई दिक्कत नही है ये Optimaization कहलाता हो या Manipulation ।
June 19, 2007 at 1:54 pm
सही है। अभी तक नीरज राजपूत ने धन्यवाद अदा किया कि नहीं! :)संजय बेंगाणी टिपियाना जारी रखें!
June 19, 2007 at 1:54 pm
हम्म, बहती गंगा में हाथ धो लो आप भी और क्या।
नए लोगों को प्रोत्साहित करने में पहले संजय भाई और समीर जी के बाद मेरा भी नंबर था लेकिन अब कई ऐसे नए नए अजीबोगरीब बकवास ब्लॉग आ रहे हैं कि मन नहीं करता। फिर डर लगता है कि पता नहीं कौन किस विचारधारा का हो।
June 19, 2007 at 2:20 pm
गलत जानकारी है, मेरा मतलब है कि गूगल का spider केवल एक सॉफ़्टवेयर है, उसमें अपनी समझ नहीं है। कदाचित् आपको ज्ञात नहीं, गूगल के सर्च रैंकिंग और relevance जाँचने के लिए आप और मुझ जैसे मनुष्य बैठे होते हैं जो कि unrelevant सामग्री और इस तरह की manipulation को पकड़ने का कार्य भी करते हैं। साथ ही गूगल ने लोगों के लिए एक फॉर्म बना यह सुविधा दे रखी है कि वे इस तरह की manipulation और स्पैम साइटों के बारे में गूगल को सूचना प्रदान करें ताकि उनपर कार्यवाही की जा सके।
आपके इस पोस्ट को लिखने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, जानता हूँ कि आपने यह मज़ाक में लिखी है और मैं भी अन्य लोगों की भांति इस मज़ाक का स्वागत करता हूँ, लेकिन इस बारे में आपको जो भ्रांति थी उसको दूर करने का प्रयास किया। आगे आपकी इच्छा।
June 19, 2007 at 2:23 pm
भाई साहब आप्के ब्लॉग में कई स्थानो पे मात्राओ की ग़लती है. मैने अभी अभी एक साइट देखी है, ज़रा इसे देखे आप्को बहुत फ़ायदा होगा .मैं आप्को लीन्क देता हू http://quillpad.in/new/quill.html
June 20, 2007 at 3:53 am
@anshul15,
एकाध गलती हो सकती है लेकिन बहुत ज्यादा तो मुझे दिख नहीं रही। वैसे आपकी टिप्पणी में:
आप्के –> आपके
आप्को –> आपको
लीन्क –> लिंक
हू –> हूँ
QuillPad जैसे टूल अब ही उपयोगी हैं जब आप अपने कंप्यूटर से दूर कैफे वगैरह में नैट प्रयोग कर रहे हों, अन्यथा IME ही सही हैं जिनसे कि आप कंप्यूटर पर हर जगह हिन्दी में लिख सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए निम्न कड़ियाँ देखें:
http://akshargram.com/sarvagya/index.php/Phonetic
http://akshargram.com/sarvagya/index.php/IME
June 20, 2007 at 4:23 am
सूचना हेतु धन्यवाद, नीरज जी की कविताएँ पढ़ आए हैं।
June 20, 2007 at 6:01 am
श्रीश जी आप अपना काम करे । अगर आपको लग रहा है कि आप सही हैं तो दुसरे के बोलने पर फिक्र्मंद ना हो । दुसरे हमेशा बोलते ही रहेंगे
अमित जी जब इस बन्दे को SEO और SPYDER कि जानकारी है तो ये तो पता ही होगा कि ये आदमी होते हैं या Software । खैर आपने बताया इसके लिए धन्यवाद ।
थोडा बहुत कंप्यूटर मैं भी जनता हु, हां पेशे से जरूर पत्रकार हु वेबमास्टर नही
अंशुल जी आपने ये नही बताया कि वर्तनी कि गलतिया कहा हैं । खैर होंगी तो इसके लिए क्षमा कीजियेगा । मैं गूगल के Transliteration का उपयोग कर हिंदी लिखता हू शायद इसलिये कही गलती रह जाती होगी