इस जुमले के बारे में आप लोगों को तो खूब पता होगा। यह एक तरीके की मार्केटिंग है। ‘मैं तुझे मीर कहूं, तू मुझे गालिब’।
रजनीकांत ने शिवाजी फिल्म के रीलीज के बाद उठे एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि अमिताभ बच्चन भारतीय सिनेमा के ‘शहंशाह’ है। उन्होंने कहा था, Yes i am the King but he is Emperor.
अब बारी थी अमिताभ बच्चन की, उन्होंने रजनीकांत के इस बयान पर एक पत्रकार को कहा कि रजनीकांत ही असल ‘शहंशाह’ हैं। अमिताभ के बोल थे, ‘Rajni is phenomenal. The largest, the best and truly the boss! It is ridiculous to compare me with him।
अब यह बहस तो बड़ी देर तक चलती रहेगी कि दोनों में से सचमुच बड़ा कलाकार कौन है। रजनीकांत, जो एक टैक्सी ड्राइवर से यहां तक पहुंचे या अमिताभ जिनकी बीमारी पर मंदिरों के बाहर भीड़ लंबी हो जाती है।
वैसे दोनों अपनी-अपनी जगह महान हैं।
June 22, 2007 at 10:50 am |
दोनों ही अतुलनीय हैं। वैसे मुझे आपका शीर्षक पसंद आया “मैं तुझे मीर कहूं, तू मुझे गालिब”
*** राजीव रंजन प्रसाद
June 22, 2007 at 11:29 am |
तुलना ना ही की जाए तो अच्छा है।
June 22, 2007 at 11:54 am |
शीर्षक बेहद अच्छा है
June 22, 2007 at 11:54 am |
अरे भईया चैनल वालों को तो समय भरने के लिए कुछ चाहिये । पर हम क्यों तुलना कर रहे हैं ।
June 22, 2007 at 4:35 pm |
दोनों की तुलना करने का कोई औचित्य नहीं है. दोनों ही महान कलाकार हैं और अतुलनीय हैं.
शीर्षक मजेदार रहा!!
June 22, 2007 at 5:11 pm |
यूनुस भाई सही बोले, हम भी सहमत हैं।