नारद का एकाधिकार खत्म होगा!
अर्थशास्त्र का छात्र रहा हूं। मोनोपोली या एकाधिकार बाजार के लिए कभी अच्छा नहीं होता। यह सभी लोग जानते हैं। हां यह जरूर है कि नारद बाजार नहीं है क्योंकि इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे पैसे की उगाही होती हो। लेकिन फिर भी नारद का काम करने का तरीका हमेशा विवादों में रहा है।
पिछले दो दिनों में मैंने दो एग्रीगेटर देखे हैं। मैंने नहीं जानता कि यह क्यों बनाया जा रहा है? वह भी तब जब नारद ‘बाजार’ नहीं है। साथ ही जो आने वाले एग्रीगेटर हैं वह भी बाजार की खूबियों से दूर रहेंगे। फिर इनकी जरूरत क्यों?
नारद में कुछ ना कुछ कमी रही होगी जिसे नारद के कर्ता धर्ता शायद नहीं समझ पा रहें हैं। पहले प्रतीक पांडे ने हिंदी ब्लाग्स बनाया और अब चिट्ठाजगत और ब्लागवाणी।
बात सेक्स क्या को जोड़ने को लेकर हो या फिर राहुल का बाजार को हटाने को लेकर। सब काम कुछ दो-तीन लोग ही करते हैं। सदस्यों से तो ना कोई राय ली जाती है ना ही कोई मशविरा।
वैसे हिन्दी ब्लागिंग में नारद की भूमिका सराहनीय है। लेकिन समय के साथ होने वाले बदलावों के प्रति शायद नारद उतना गंभीर नहीं है और इसका कारण है यह आने वाले फीड एग्रीगेटर। कोई कहीं ना कहीं असंतुष्ट है इसी के कारण यह सारे एग्रीगेटर लाए जा रहे हैं।
खैर जो कुछ भी हो रहा है इससे मैं इतना ही समझ पा रहा हूं कि इंटरनेट पर हिंदी की वर्चस्वता बढ़ेगी।
July 3, 2007 at 9:06 am
[...] रचनात्मकता नाम की कोई चीज़ नही है। -नारद का एकाधिकार खत्म होगा! [...]
July 3, 2007 at 9:27 am
धन्यवाद अपका इस ओर नारद के कर्णधारों का ध्यान दिलाने के लिए. आशा है उनकी रातों की निंद आपने उड़ा दी होगी.
वैसे हिन्दीब्लोग, चिट्ठाजगत व ब्लोगवाणी बनाने वाले भी साथी लोग ही है और निसंदेह इन्हे बनाने के पीछे “राहूल के चिट्ठे का हटना” जैसी गैर महत्त्वपूर्ण घटना नहीं हो सकती. अच्छे कार्य तुछ कारणो से शुरू नहीं होते.
आशा है आपकी पोस्ट के बाद नारद वाले सबको संतुष्ट करने का काम शुरू कर दे.
नारद पर दो-तीन लोग ही निर्णय लेते है, तो बाकि के एग्रीगेटर कितनो की सलाह लेकर बनाये गये है? कितनो की सलाह से चलाये जा रहे हैं?
July 3, 2007 at 10:11 am
संजय जी इन सब बातो से किसी के रातो कि नींद नही उड़ती है । रातो कि नींद तो …. । मैंने कभी नही कहा कि राहुल कि घटना के कारण इनकी शुरुआत हो रही है लेकिन कमी तो जरुर कही रह गई है । बाकी एग्रीगेटर में कितने लोग निर्णय लेते हैं यह नही देखना चाहिऐ । आप एक ही निर्णय ले लेकिन सबको संतुष्ट कर दे । उसकी कमीज मेरे से गन्दी है यह देखना छोड़ दे ।
July 3, 2007 at 12:15 pm
गूगल का एकाधिकार खत्म होगा. माइक्रोसॉफ्ट का एकाधिकार खत्म होगा. ईबे का एकाधिकार खत्म होगा. मैकडोनल्ड का एकाधिकार खत्म होगा. कोका-कोला का एकाधिकार खत्म होगा.
कहाँ हैं जनाब? जो ‘बेहतर’ होगा, उसका एकाधिकार रहेगा ही रहेगा. हम चाहें या नहीं चाहें. ताज़ा अर्थशास्त्र यही कहता है.
July 3, 2007 at 12:25 pm
मेरे ख्याल से नारद पर किसी व्यक्ति विशेष का एकाधिकार नहीं होगा अन्यथा मेरे तीन ब्लॉगों की कोई न कोई प्रवष्ठि जरुर रुकती। आज तक मुझे वहां से कोई प्रतिकूल जवाब नहीं मिला। हालांकि, मेरी राय में जो भी लिखा जाए वह देश, समाज के हित में हो, ऐसी भाषा में हो जो बोलते समय सुंदर लगे और सुनते समय भी। ब्लॉग में पढ़ते समय भी भाषा सुंदर हो, सुंदरता को हर कोई देखना चाहता है। बाजार की बात करें तो बेहतर उत्पाद ही बाजार में टिक पाते हैं, खराब नहीं। यदि नारद खराब उत्पाद होगा तो वह बाजार से बाहर हो जाएगा। नारद कैसा रहता है, उसका भविष्य इस पर तय होगा, इसलिए बहस में पड़ने की जरुरत नहीं है।
July 3, 2007 at 1:15 pm
हजारों आयेगें पर नारद तो नारद ही रहेगा। कुछ कमियॉं हो सकती है, कई नारद से अच्छे भी आयेगें किन्तु जिस भूमिका में नारद है, उसे पाने अभी नये को कई पापड़ बेलने पडेगें।
July 3, 2007 at 1:53 pm
भाइ जी आप लोग काहे की बहस मे पडे हो.आज नारद नये ब्लोग के रजिस्ट्रेशन नही कर पा रहा है,किसी के भी ज्यादा पोस्ट होने पर भी वह संभाल नही पा रह था,आने वाले कल मे काफ़ी सारे नये चिट्ठे आने की संभावनाये है,नारद ने हिंदी चिट्ठे का शैशव काल पूरे मनोयोग और मेहनत लगन के साथ निभाया है उस्का स्थान कोई नही ले सकता. पर पेड बनने पर तो शाखाये फ़ैलेगी ही ना,तब उनको ज्यादा स्थान चाहिये ज्यादा खुलापन चाहियेगा,बस उसी सब की पूर्ती के लिये नारद के सहयोगी एग्रीगेटर की तरह क्यो नही आप इन सब को देख रहे है,वो चाहे हिंदी ब्लोग हो चाहे चिट्ठाजगत चाहे ब्लोगवाणी
जो अच्छा होगा वो सबसे ज्यादा देखा जायेगा,बस बाकी को अपने को उस लेवल पर लाना पडेगा एक अच्छी प्रति स्पर्धा होगी,इससे ज्यादा कुछ नही
July 4, 2007 at 5:23 am
टिप्पणीकार जी आपने अपना पहचान क्यों छुपा लिया । खैर जिस मेल id को आपने डाला है अगर आप वही हैं तो मैं आपको एक बात बता दू कि सुबह सुबह एक खबर आई है कि बिल गेट्स दुनिया के सबसे अमीर आदमी नही रहे उनकी जगह Mexico के कार्लोस सलीम ने ले लिया है । वैसे ये भी बता दू कि जो स्थिति माइक्रोसॉफ्ट कि १९९५ में थी वो आज नही हैं
July 4, 2007 at 5:43 am
किसी को मिर्ची लग रही है। कुछ जलने की बू आ रही है। लगे रहो मुन्ना भाई !!
July 4, 2007 at 6:07 am
Sabse pahle to aap log ye bila wajah ki sar futtawal band karo.
Internet par hindi blogs ke aggregation ke vikalp aane se Internet par hindi ke pathak badhenge, ye swagat yogya kadam hain.
Hamne jo jyoti jalai thi, woh aaj Mashaal ka roop le rahi hain, iska hame fakhr hai. Ye sabhi sites Narad ki pratispardhi na hoker, ek behatareen Poorak banegi, aisa mera Vishwas hai.
Takneek is yug mein, Abhi aur behtareen vikalp aayenge, Lekin mera sirf itna kahna hai, nayi sites banane wale, aur behtar vidhao par bhi kaarya karein, Narad jaisi sites to ab kaafi hain, hame aur bhi vidhao par sites chahiye. Yaad Rakhiyega, Hindi ki jitni jyada se jyada sites aayenge, utni jyada se jyada hindi ke pathak badhenge. Yahi hum sabka uddeshya hona chahiye.
AAIYE HUM SAB SAATH MILKAR, INTERNET PAR HINDI KO USKE UCHIT MUQAAM TAK PAHUNCHAYEIN.
July 4, 2007 at 6:40 am
सब से पहले तो आप लोग ये बेवजह की सर फुटोव्वल बन्द करो।
इन्टरनेट पर हिन्दी ब्लॉग्स के एग्रीग्रेशन के विकल्प आने से इन्टरनेट पर हिन्दी के पाठक बढ़ेंगे, ये स्वागत योग्य कदम है
हमने जो ज्योती जलाई थी, वो आज मशाल का रूप ले रही है, इसका हमें फक्र है। ये सभी साईट्स नारद की प्रतिस्पर्धी ना होकर, एक बेहतरीन पूरक बनेंगी, ऐसा मेरा विश्वास है।
तकनीक के इस युग में, अभी और बेहतरीन विकल्प आयेंगे, लेकिन मेरा सिर्फ इतना कहना है, नयी साइट्स बनाने वाले, और बेहतर विधाओं पर भी कार्य करें, नारद जैसी साइट्स तो अब काफ़ी है, हमें और भी विधाओं पर साइट्स चाहिये। याद रखियेगा, हिन्दी की जितनी ज्यादा से ज्यादा साइट्स आयेंगी, उतने ही ज्यादा से ज्यादा हिन्दी के पाठक बढ़ेंगे। यही हम सबका उद्देश्य होना चाहिये।
आईये हम सब साथ मिलकर. इन्टरनेट पर हिन्दी को उसके उचित मुकाम तक पहुंचायें।
July 4, 2007 at 6:48 am
100 % अनुमोदन जीतू जी की बात का
बस इतना सा कहना है कि इतना अंतर तो अब आ ही गया है
“अब कोई किसी से यह नही कह पायेगा,अपना एग्रीगेटर बनालो हम तो ऐसे ही करेगे”
July 20, 2007 at 11:07 am
सही कहा जितु भाई, मै आप से सौ फिसदी सहमत हु ।
November 29, 2007 at 5:37 pm
नारायण नारायंण ,नारद तो नारद ही है नारद के लिए ढेर सी शुभकामनाएं