ब्लागिंग से सड़क तक, सब अहम की लड़ाई लड़ रहे हैं!

मुझे तो ऐसा ही लगता है। जिसको ना लगता हो अपनी असहमति जरूर दर्ज कराएं। साथ में कारण बताएं।

अहम। एक से बढ़कर एक। पेशेवर ड्राइवरों में तो जबरदस्त होती है। वह मेरे से आगे कैसे निकल सकता है। मैं उसे साईड ही नहीं दूंगा। या फिर उसे ‘साईड’ ही लगा दूंगा।

सड़क दुर्घटना की खबर सुनकर मैं थोड़ा परेशान हो जाता हूं। लेकिन भागते दौड़ते शहर में यह रोज होता है और मैं जिस पेशे से जुड़ा हूं वहां रोज दस दुर्घटना की खबर आपको पढ़ने को मिलेगी। इनसब में से कई दुर्घटनाओं की मूल वजह अहम ही होती है।

ब्लागिंग में भी यही हो रहा है। कोई किसी को मेल कर रहा है कोई किसी के बारे में लिख रहा है तो कोई किसी के बारे में। लेकिन कोई भी गलती को नहीं देख रहा है। बहस होने पर तमाम तरीके के जस्टीफिकेशन। अहम ही इसकी जड़ है। वैसे इतना जरूर जानता हूं कि यह अच्छी बात नहीं है।

एक ब्लागर दूसरे को साईड नहीं देना चाहता। ‘साईड’ लगा देना चाहता है। लोगों ने गुट बना लिए हैं। मैं इसके गुट का और वो उसके गुट का। भई साहब मैं किसी गुट का नहीं हूं। मुझे बख्शे। मुझे लिखने की आदत है।

वैसे ऐसा नहीं है कि मैंने सड़क और ब्लागिंग के बारे में लिखा है तो अहम की लड़ाई केवल यहीं है। छोटे बड़े रूप में सभी जगह है।

5 Responses to “ब्लागिंग से सड़क तक, सब अहम की लड़ाई लड़ रहे हैं!”

  1. संजय बेंगाणी Says:

    ठीक है भाई मान लिया की आप किसी गुट के नहीं है, निर्गुट रूप से लिखते रहे, यही कामना है. वैसे भी आपने कह ही दिया है अहं सब जगह होता है, बच गये तो बच गए वरना टकराहट तय है.

  2. arun Says:

    भाई मै गुट निरपेक्ष आंदोलन का प्रणेता हू,आप मेरे साथ रहे.सबसे बराबर पंगा लेने का अपना पक्का इरादा है.

  3. श्रीश शर्मा Says:

    ठीक है जी, लेकिन आप परेशान क्यों हो रहे हैं आपको किसी ने कब कहा कि आप किसी ग्रुप में हैं?

    टेंशन नी लेने का, मस्ते रहिए व्यस्त रहिए। :)

  4. अनूप शुक्ल Says:

    बढ़िया है। किसी गुट में न रहें। लिखने की आदत बनाये रखें।

  5. चिट्ठाकार Says:

    छोटा लेकिन अच्छा.

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