भारत की अजीब बनावट का ही कमाल है कि यहां मुफ्त में मिलने वाली चीजें मुफ्त नहीं मिलती हैं। एफआईआर कराने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। कोई जरूरी नहीं कि पैसे देने के बाद भी आपकी एफआईआर लिख ली जाए।
हम आप सभी के साथ ऐसा हुआ होगा। सरकारी काम कराने के लिए आपको बख्शीश देनी होती है। यह बख्शीश नहीं घूस होती है। ब्राइब। पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड। आपको अधिकारी से लेकर पुलिस वाले को पैसा देना ही पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने कल अपने एक आदेश में कहा है कि राज्य यह सुनिश्चित करे कि लोगों के एफआईआर लिखे जाए। रविवार रात दिलवालों की नगरी दिल्ली में कुछ 40-50 लड़कों की टोली ने उत्पात मचाया, जिसका कोई एफआईआर नहीं लिखा गया। यह है दिल्ली पुलिस, विथ यू, फार यू, आलवेज।
सुप्रीम कोर्ट के जज बीएन अग्रवाल ने अपना अनुभव बताया। कहा मेरी पत्नी और बेटी किसी मामले में पुलिस स्टेशन एफआईआर लिखाने गए थे जिसे लिखने में दो-तीन घंटे का समय लग गया। अगर सुप्रीम कोर्ट के जज साथ ऐसा हो सकता है तो आप अनुमान लगा सकते हैं।
आरटीआई इसका इलाज है। लोग आरटीआई को ही नहीं जानते।
क्या आप भी नही जानते ?
July 25, 2007 at 12:51 pm
इसी को तो भ्रष्टाचार, अराजकता, और न जाने क्या क्या नाम से पुकारा जाता है न भाई! वैसे RTI से इसका इलाज कैसे संभव है??
July 25, 2007 at 2:37 pm
जज साहब को दुख किस बात का था? उनकी रिपोर्ट देर तक ना लिखे जाने का या आम जनता का?
आर टी आई के बारे में हिन्दी में कुछ लिख देते तो हमें भी जानकारी मिल जाती।
July 25, 2007 at 4:38 pm
आज यही सब कुछ हो रह है।आर टी आई के बारे में हिन्दी में कुछ लिख देते तो जानकारी मिल जाती।