क्या आप अजातशत्रु बन पाएंगे?
लोग कहते हैं ना चाहने से क्या नहीं होता है! सब कुछ हो जाता है! क्या सच में सब कुछ हो सकता है? क्या आप जीते जिंदगी अजातशत्रु बन सकते हैं। अजातशत्रु। वो जिसका कोई शत्रु ना हो।
आत्मविश्वास और धैर्य उसकी दो सबसे बड़ी पूंजी है। वह घड़ी के समान है। जो हमेशा चलती रहती है। उसका गुण धीरे-धीरे निखर कर आता है। पांच या दस मिनट में वह किसी को प्रभावित नहीं करता है। और ना ही पांच या दस दिनों में। उसका असली गुण आपके सामने कुछ महीनों में आपको दिखता है।
मेरा एक दोस्त है। उम्र यही कोई 27-28 होगी। वह भी पत्रकार है। जितना मैं उसके बारे में जानता हूं, उसके मुताबिक वह जीते जिंदगी अजातशत्रु बना हुआ है। मेरे जैसे कई दोस्त हैं उसके। यूं कहिए लंबी फेहरिस्त है। लेकिन कोई उसका शत्रु नहीं है। कोई उसका बुरा नहीं चाहता। कोई उससे ईष्र्या नहीं करता। गजब है वो। उसके लिए मैं हमेशा एक बात लोगों को बोलता, बहुत ही सरल है वो।
सिंपली आउटस्टैंडिंग। बहुत आगे जाएगा मेरा यह दोस्त सिद्धार्थ।
August 18, 2007 at 7:57 am
सही है जी
August 18, 2007 at 10:42 am
हमारी तरफ से भी आपके मित्र को शुभकामनाएँ कि वे ऐसे ही बने रहें ।
घुघूती बासूती
August 18, 2007 at 12:07 pm
मेरी जानकारी अनुसार “अजातशत्रु” वह नहीं होता जिसका कोई शत्रु न हो, बल्कि वह होता है जिसका कोई शत्रु जीवित न हो, मतलब जिसने अपने सभी शत्रुओं पर विजय पा ली हो। दोनों अर्थों में बहुत अंतर है।
August 18, 2007 at 12:44 pm
अमित जी आपने पढा इसके लिए धन्यवाद । अब आपको बता दु कि अजातशत्रु और रिपुदमन दोनो दो शब्द हैं, एक का मतलब होता है जिसका कोई शत्रु ना हो तो दुसरे का अपने शत्रूवो को मारने वाला ।
August 18, 2007 at 4:51 pm
अमित अजातशत्रु का अर्थ होता है जिसका शत्रु पैदा न हुआ हो। मतलब वही है कि जिसका कोई शत्रु ही न बना हो कभी।
August 18, 2007 at 5:20 pm
बताने के लिए धन्यवाद, हो सकता है मैंने गलत पढ़ा हो या मुझे गलत ध्यान रह गया हो।
August 18, 2007 at 7:04 pm
प्रिय राजेश जी, मैं शायद इस लायक नहीं। आपका मन सुंदर है इसलिये आपको दुनिया की हर चीज अच्छी लगती है।
August 19, 2007 at 12:34 am
आपका आपके मित्र के प्रति स्नेह देख नमन करने को जी चाहता है. सिद्धार्थ जी तो जरुर काबिले तारीफ होंगे ही. उन्हें हमारी शुभकामनायें दें. वह अजातशत्रु बने रहें यही कामना है.
August 19, 2007 at 7:37 am
सिद्धार्थ जी मैने जो आपके बारे में कहां वो केवल मैं नही आपको जानने वाले सभी लोग कहते हैं कि आप इस काबिल हैं ।