वजीर्निया हत्याकांड व अर्थशास्त्र

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देश तरक्की कर रहा है। और करेगा। लेकिन इसके साथ ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। लोग पैसा और नाम के पीछे अंधी दौड़ लगा रहे हैं। दूसरा पहले से आगे निकलना चाहता है। पता नहीं कौन-कौन से तरीके लोग अपना रहे हैं। सोमवार को वजीर्निया में कोरियन मूल के एक लड़के ने पहले 33 लोगों की जान ले ली।

1999 के आंकड़ों के अनुसार कुल 21 करोड़ लोगों के पास अपनी बंदूक थी। आज अमेरिका की जनसंख्या तीस करोड़ पंद्रह लाख से कुछ ज्यादा है। अमेरिकी कानून के मुताबिक अगर आप वोट दे सकते हैं तो आप बंदूक भी खरीद सकते हैं।
मैंने इंटरनेट में हथियारों से हुई आय को ढूंढना चाहा लेकिन मिला नहीं। खैर यह कारोबार अमेरिका में अरबों में होगा।

बात करते हैं वजीर्निया हत्याकांड की तो मैं यह बता दूं कि जिस छात्र पर इसका आरोप लगा है उसके नाम के डोमेन को अमेरिका के ही किसी शख्स ने बुक करा लिया है। यह बात दीगर है कि उसका उपयोग वह वजीर्निया एकेडेमी के लिए ही कर रहा है।

यह है वजीर्निया हत्याकांड का अर्थशास्त्र

14 Responses to “वजीर्निया हत्याकांड व अर्थशास्त्र”

  1. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' Says:

    राजेश जी सबसे पहले तो हिन्दी (देवनागरी) में लिखना शुरु करने के लिए बधाई! आखिर आपने हमारी बात मान ही ली। अब तो आपको पता लग ही गया होगा कि फोनेटिक औजारों से हिन्दी में लिखना रोमन में लिखने जैसा ही है, बस एक टूल उपयोग करने की जरुरत है।

    परिचर्चा पर आपके प्रश्न पर मेरा जवाब तो आप पढ़ ही चुके होंगे। उम्मीद है आपको उससे कोई आसान तरीका अवश्य मिलेगा।

    अब आप नारदमुनि को यह खबर दे दें वे आपका ब्लॉग रजिस्टर कर देंगे।

    फिलहाल यह बताइए कि यह पोस्ट कौन सा टूल उपयोग करके लिखी है?

  2. श्रीश शर्मा 'ई-पंडित' Says:

    खैर आपने हिन्दी में लिखना शुरु किया मैं जाकर चिट्ठाकार समूह पर सूचना देता हूँ। साथ ही आप नारदमुनि को खबर कर दें। फिर देखिए हिन्दी का कमाल, सभी आपके चिट्ठे पर आते ही होंगे।

  3. शैलेश भारतवासी Says:

    राजेश जी, चिट्ठाकारी की दुनिया में आपका स्वागत है।

  4. अनुनाद Says:

    स्वागत है राजेश ! देवनागरी में हिन्दी लिखने पर पढ़ने वालों को बहुत कम कष्ट होता है और ध्यान विषय पर केन्द्रित करने में आसानी होती है। देवनागरी में हिन्दी लिखना शुरू करने के लिये साधुवाद!

  5. अतुल शर्मा Says:

    राजेशजी देवनागरी में लिखने के लिए बधाई! आगे भी लिखते रहें।
    भैया हमारी समझ इंटरनेट आदि के मामले में कम है, इसलिए अंतिम पैरा समझ नहीं आया क्या आप पूरा मुद्दा समझाएँगे। यदि बाद लंबी हो तो अलग पोस्ट भी लिख सकते हैं।

  6. संजय बेंगाणी Says:

    देवनागरी में लिखने के लिए बधाई.

  7. Amit Says:

    बधाई जी बधाई🙂

  8. अफ़लातून Says:

    ऐसी दर्दनाक घटनाओं के बाद बन्दूक-संस्कृति पर चर्चा कुछ दिन चलती है।बन्दूक की गोली से मरने वालों की तादाद भी उस महान राष्ट्र में सर्वाधिक है (सालाना ३०.०००)।फिर आपने जिस संवैधानिक हक का जिक्र किया है उसके पक्ष में तर्क भी मौजूद है- ‘आदमी आदमी को मारता है-बन्दूक नहीं मारती’ ।
    देवनागरी में लेखन की शुरुआत पर शुभकामना ।

  9. Sanjeet Tripathi Says:

    स्वागत के साथ बधाई देवनागरी में लिखना प्रारंभ करने के लिए।
    शुभकामनाएं

  10. Sanjeeva iwari Says:

    Rajesh Bhaiya
    Rangreji men likh raha hoo Chamiyana !
    Achha laga aapko apne Ghar men Dekh kar

  11. अनिल सिन्‍हा Says:

    स्‍वागत और लख लख बधाईयां

  12. neerajdiwan Says:

    कल रात मैं भी यही सोच रहा था कि ये अमेरिका में आए दिन पगलाए लोग शूट आउट क्यों करते हैं. सच है भाई ये कड़वी बात है.. यह पूरी दुनिया में फैली अशांति पर लागू हो रहा है कि हथियार बनाने वाली कंपनियां लड़ाईयां प्रायोजित कर रही है.

  13. Rajesh Roshan Says:

    श्रीश जी, शैलेश जी, अनुनाद जी, अतुल जी, संजय जी, अमीत जी, संजीत जी, संजीव जी, नीरज जी व समतावादी वाले पहले तो आप सभी को धन्यवाद। आप सभी के प्रयासों से यह मुमकिन हो पाया। मेरी पूरी कोशिश होगी की मैं अपनी हर प्रविष्टि को हिन्दी में लिख पाऊं। कभी ऐसा नहीं हो पाए इसके लिए आप लोगों से पूर्व में क्षमा मांग लेता हूं।
    अतुल जी ऐसा है http://www.yahoo.com डोमेन कहलाता है इसी प्रकार से वजीर्निया हत्याकांड के लिए जिम्मेदार लड़के का नाम चो सेंग-हुई है जिसको किसी ने रजिस्टर करा लिया है। ज्यादा जानकारी आपको जीतू जी दे सकते हैं।
    अफलातून जी (समतावादी) ने जैसा लिखा कि लोग आदमी आदमी को मारता है। बात सही है लेकिन मानसिकता की बात है। क्यों स्कूल कालेज में ऐसी घटनाएं अमेरिका में ज्यादा होती हैं। कुछ तो कारण जरूर होगा?
    आपने सही कहा नीरज जी । विश्व में सबसे बड़ा कारोबार अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त का है ।

  14. PRAMENDRA PRATAP SINGH Says:

    हार्दिक स्‍वागत और सार्थक लेख की बधाई।

    आज के सर्वभौमिक वातावरण मे यह तो होगा ही। जब लोग मानव मूल्‍यों की हत्‍या कर रहे है। न आज कोई किसी का सगा रह गया है। यह चिंतनीय बात है।

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