भुक्खड़ हैं ये सांसद

by

पैसा, पैसा और पैसा । इनके लिए पैसा ही सब कुछ है । कुर्सी की खींचतान भी पैसे के लिए । सवाल पूछ सकते हैं । धार्मिक उन्माद फैला सकते हैं । कबूतरबाजी में शामिल हो जाते हैं । यहां तक कि पैसे (तनख्वाह) के लिए संसद में कानून तक बदल डालते हैं।

यह जरूर मानता हूं कि सब के सब ऐसे नहीं हैं लेकिन इसकी संख्या बढ़ रही है । हर घटना एक नया खुलासा करती है । पैसों के लिए, हर सरकार में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं । इनके लिए एक सूत्र है- बाप बड़ा ना भैया, सबसे बड़ा रुपैया ।

चार पंक्तियां याद आ रही है-
टका जगत का सार है
देत सुख विशेष
जाके पास टका नहीं
बैठ टका-टक देख ॥

क्या इसी को जानकर सांसद ऐसे काम कर रहें हैं ? क्या इनका कोई दायित्व नहीं है ? हमारे देश में हर साल एक नया घोटाला सामने आता है । चावल घोटाला, तेल घोटाला, जमीन घोटाला…यहां तक कि कफन को लेकर भी इन नेताओं ने घोटाला कर दिया ।

कैमरे के सामने कई नेता घूस लेते पकड़े गए । कुछ नामों पर गौर करें और सोचे क्या इन्हें भी पैसों की इतनी जरूरत होगी कि यह घूस लें । जया जेटली, बंगारू लक्ष्मण, जूदेव । बीबीसी की यह रिपोर्ट आपको कुछ और नामों को बताएगी ।

सामान्य विद्यार्थी से नेता और नेता से मैनेजमेंट गुरु बने लालू यादव पर चारा घोटाला, देश की छवि बदलने वाली नीति लाने वाले स्वर्गीय पीवी नरसिंह राव पर झामुमो घूस कांड और ना जाने ऐसे कितने कांड और घोटाले है । इन नेताओं पर आरोप लगते रहे हैं लेकिन आरोप साबित होना यह तो दूर की बात ।

इनके हाव-भाव और बयान इन सब के बाद तो बस पूछिए मत.. लालू जेल जाने के बाद कहते हैं कि कृष्ण का जन्म ही जेल में हुआ था । जूदेव पर आरोप लगने के बाद वह अपनी मूछों पर थोड़ा और ताव देते दिखाई पड़ते हैं ।

देश को आगे ले जाने के लिए युवाओं को आना होगा, इस संकल्प के साथ कि देश को एक नई दशा-दिशा दें । विश्व फलक पर भारत का नाम रोशन करने के लिए पहल करना होगा।

4 Responses to “भुक्खड़ हैं ये सांसद”

  1. Shrish Says:

    पैसों और सत्ता लोभ ने नेताओं की बुद्धि हर ली है। इसके लिए वे देश को भी बेच खाने को तैयार बैठे हैं। पता नहीं यह हालात कब सुधरेंगे।

  2. नीरज दीवान Says:

    नेता भी नागरिक है. नागरिक भ्रष्ट. नेता भ्रष्टों के सरदार. जैसे हर नागरिक भ्रष्ट नहीं वैसे हर नेता भी भ्रष्ट नहीं. भ्रष्ट नेता राजनीति की पहली सीढ़ी पर क़दम रखने से पहले ही पैसा कमाने का लक्ष्य तक कर लेते हैं. कुछ आते हैं गंदगी दूर करने लेकिन सियासी मजबूरियों और तंत्र के चंगुल में फंस जाते हैं. कुछ दामन बचाकर किनारे लग जाते हैं. गंदगी साफ़ नहीं होती. शुरूआत नागरिकों को करनी होगी. राइट टू रिकॉल लाओ. दबाव बनाओ.

  3. Suneet Narwal Says:

    Ye to mere bharat ka durbhagya hai ki hamare desh me aise aise politicians hain. Sab ke sab paise ke chakkar me rahte hain. ye log India ki bholi bhali janta se jhoothe wade kar loksabha tak jate hain or kya gul khilate hain ye to hum sab ke saamne hai. Pata nahin ye swarthi log bharat ki rajnity me rahenge……

  4. Sanjeeva Tiwari Says:

    बात उम्र की नहीं सोच की है, अच्छे विचारशील युवा की आवश्यकता है

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s


%d bloggers like this: