प्रेस का स्टीकर भी बोलता है!!!

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दिल्ली व दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव व बहादुरगढ़ के लोगों को कई सारी परेशानियां झेलनी पड़ती है। जो लोग रहते हैं उन्हें बखूबी मालूम होगा। कोई परेशानी होने पर आप 100 नंबर नहीं लगा सकते। चूंकि यह दिल्ली पुलिस मुख्यालय को ट्रांसफर हो जाएगा इसलिए एनसीआर में रहने वाले लोगों को थोड़ी परेशानी होती है। और भी कई छोटी बड़ी परेशानी होती है।
आज मैंने एक गलती कि लेकिन मैं परेशानी से बच गया। परेशानी और उसके निकलने की घटना बताने से पहले..। मैं दिल्ली में रहता हूं। मेरा आफिस नोएडा में है। जाने का रास्ता मुख्य सड़क से हटकर है।
हां!!! तो गलती यह हुई कि आज जब घर से आफिस आया तो मैंने हेलमेट नहीं लगाई थी। लेकिन दोपहर को खाना खाने दिल्ली के वसुंधरा इलाके में चला गया, बिना हेलमेट पहने। खाना बड़ा स्वादिष्ट था। मजा आ गया। उसके बाद एक गिलास जूस। पौष्टिक भोजन।
लेकिन जब लौटने लगा तो देखा कि दिल्ली-नोएडा बार्डर चेक पोस्ट पर कुछ सात-आठ पुलिसकर्मी वाहनों की जांच कर रहे थे। मुझे तो एहसास ही नहीं था कि मैंने कोई गलती की है। 40 किमी/प्रति घंटे की रफ्तार से चला आ रहा था। तभी एक पुलिस ने रोकने के इशारे से हाथ दे दिया। मेरा मन ठिठका। फिर एहसास हुआ कि हेलमेट..। सोचा बेटा आज अच्छे फंसे हो!!! नजदीक पहुंचते ही गाड़ी मैंने धीमी कर दी। देखा, कि कई दुपहिया-चार पहिया वाहनों को एक कतार से रोका गया है। किसी से रजिस्ट्रेशन तो किसी को चालान की गुलाबी कापी के साथ। तभी एक पुलिस वाले ने कहा कि अरे!!! इन्हें जाने दो। स्टाफ की गाड़ी है। और आगे जाने के लिए रास्ता दिया।
मेरे गाड़ी के आगे लाल अक्षरों में प्रेस, दैनिक जागरण लिखा हुआ था।

मूल बात
मैंने यह गलती आज कि है, मैं इसे मानता हूं और आइंदा से मैं बिना हेलमेट नहीं चलूंगा। हेलमेट पहनना हमारी सुरक्षा के लिए कानून रूप में शामिल किया गया है।

9 Responses to “प्रेस का स्टीकर भी बोलता है!!!”

  1. Sanjeeva Tiwari Says:

    gajab likhate hai rajroshan ji maine kaha tha na ki umar hi sabkuch nahi hota aap to bado jaisa likhte hai

  2. Sanjeet Tripathi Says:

    प्रेस का स्टीकर बोलता ही नही बल्कि ऐसा बोलता है कि बड़े बड़े की बोलती बंद कर देता है भैया!
    दर-असल 6 साल पत्रकारिता जगत में रहने के बाद भी अपनी बाईक पर मैंने कभी ” प्रेस” वाला स्टीकर नहीं लगाया, मन ही नहीं किया कभी ऐसा स्टीकर लगाने का।

    वैसे आप जिस महानगर में हैं वहां तो यह स्टीकर लगाना ही बेहतर है।

  3. विशेष Says:

    अगर आप अखबार से जुड़े हैं तो आपको ये पहले से मालूम नहीं था क्‍या…
    यह एक कटु सत्‍य है कि कुछ लोग संस्‍थान का नाम लिखने के बजाय सिर्फ प्रेस लिखते हैं. इसका क्‍या तुक है.
    यही ना कि प्रेस का स्‍टीकर बोलता है.

  4. Rajesh Roshan Says:

    नही मैं इतना नादाँ भी नही हु कि मुझे ये सब पता ना हो। फिर भी । हां !! एक बात साफ कर दू कि स्तिच्कर जो है वो संस्थान के तरफ से मिला है जिसमे प्रेस ऊपर और दैनिक जागरण नीचे लिखा हुआ है। एक बात और मैं यहा के संपादकीय विभाग में हू।

  5. Raj Says:

    मुझे मान हे आप सब पर, ध्न्य हे मेरा देश,जहा गलत को भी सही कहा जाता हे,ओर मान से कहा जाता हे!!!

  6. paramjitbali Says:

    गलती का होना ,अलग बात है।उसे स्वयं ही स्वीकार करना ,आप्के बड़्प्पन को दर्शाता है।

    मूल बात
    मैंने यह गलती आज कि है, मैं इसे मानता हूं और आइंदा से मैं बिना हेलमेट नहीं चलूंगा। हेलमेट पहनना हमारी सुरक्षा के लिए कानून रूप में शामिल किया गया है।

  7. Raj Says:

    बात इन की गलती कई नही, गलती पुलिस वाले की हे, जो कानून का सही पालन नही करते.कानून सभी के लिय समअन हे,मेरा मतलब किसी का दिल दुखना नही हे, फ़िर भी माफ़ करना अगर कुछ बुरा लगे.ध्न्यवाद

  8. समीर लाल Says:

    सच है प्रेस का स्टीकर बोलता है और आपका यह मान लेना कि मैंने यह गलती आज कि है, मैं इसे मानता हूं और आइंदा से मैं बिना हेलमेट नहीं चलूंगा। हेलमेट पहनना हमारी सुरक्षा के लिए कानून रूप में शामिल किया गया है।

    बहुत अच्छी बात है वरना तो बहुत से लोग प्रेस लिखने के बाद तो कानून के उलंघ्न को अपना अधिकार समझने लगते हैं.

  9. kripal Says:

    Its true there is power in press sticker and its also true that indian police has no moral no discipline only corruption but so what our politicians are also corrupt which are choosed by We People so ultimately we all are corrupt🙂

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