हिन्दू धर्म क्या है: सेक्स या मुक्ति । क्या हम बात कर सकते हैं??

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bloमेरे एक करीबी मित्र हैं जो भारत और भारत से जुड़ी अनेक चीजों पर बहुत गर्व करते हैं। मैं भी करता हूं..लेकिन सभी चीजों पर नहीं। खैर, मेरे उस दोस्त को विदेश की कुछ अगर पसंद है तो वह है वहां की फिल्में। जी सिनेमा नहीं जी एमजीएम देखता है। साथ ही स्टार मूवीज और एचबीओ। अब उसके पीछे उसकी मानसिकता मैं नहीं जानता या फिर मौन रहना चाहता हूं।

दोहे तो उसे खूब याद हैं, चौपाई भी। एक घंटे की बातचीत में रामायण, महाभारत के कई प्रसंग सुना देता है। धर्म की बात करने पर हिन्दू को सबसे पुराना धर्म बताते हुए एक श्लोक सुना देता है। बाकी धर्मो के बारे में.. नेक ख्याल तो नहीं रखता है।

हम दोनों सुबह-सुबह CNN पर एक प्रोग्राम देख रहे थे.. Anderson Cooper 360। उस स्पेशल प्रोग्राम में बात हो रही थी ‘ईसाईयत क्या है: सेक्स या मुक्ति।’ मैंने उससे कहा कि ‘हिन्दू धर्म क्या है: सेक्स या मुक्ति’। गुस्से में आकर मुझे ना जाने क्या-क्या बोल बैठा। मैंने कहा क्या मुझे यह प्रश्न पूछने का भी अधिकार नहीं है। उसने कहा तुम जानते क्या हो हिन्दू धर्म के बारे में। टीवी देखकर कुछ भी पूछ देते हो। तो मैंने कहा कि भगवान करे तो लीला और मैं करूं तो सेक्स और भोग।

सीएनएन के इन तीनों प्रोग्राम के स्क्रिप्ट आनलाइन हैं जो यहां देखे जा सकते हैं। क्लिक, क्लिक, क्लिक

मैं यह पूछता हूं कि क्या हमें धर्म के बारे में सीएनएन की रिपोर्ट की तरह नहीं बात करनी चाहिए। क्या पहले जो बातें लिखी गई हैं, उसी को सत्य मानते हुए उसकी पूजा करनी चाहिए। मैं विश्वासी हूं अंधविश्वासी नहीं। चाहे वो मामला धर्म से जुड़ा ही क्यों ना जुड़ा हो।

17 Responses to “हिन्दू धर्म क्या है: सेक्स या मुक्ति । क्या हम बात कर सकते हैं??”

  1. vishal Says:

    धर्म न तो सेक्स है ना हि मुक्ति, दरअसल सेक्स भी धर्मसंगत हो सकता है और मुक्ति भी. इस शीर्षक का कुछ मतलब नहीं समझ आता. “धर्म क्या है सेक्स या मुक्ति”, जैसे सेक्स और मुक्ति पूरब पश्चिम हो गये और धर्म हाइवे जो किसी एक ओर ले जायेगा. खबर चटपटी शीर्षक वाली न हो तो देखेगा कौन.

  2. anamdasblogger Says:

    दोस्त
    धर्म क्या है और क्या नहीं, यह तो बहुत पेचीदा बहस है. इस बात का स्वागत होना चाहिए कि आप उसे समझने की कोशिश कर रहे हैं और उसे लेकर आप अति संवेदनशील नहीं हैं, आपकी भावनाएँ आसानी से आहत नहीं हो रहीं. संधान जारी रखिए.
    अनामदास

  3. विशाल Says:

    अवश्य चर्चा होनी चाहिए और ईमानदारी से निरपेक्ष चर्चा होनी चाहिए, मेरे कहने का आशय भी यही था. धर्म की चर्चा पेचीदा होने ना होने से पहले व्यापक है. लेकिन कई बार लोग किसी धर्म विशेष का मजाक बनाने के लिए, या फिर नास्तिकवाद के प्रभाव में चर्चा को संकीर्ण बना देते हैं जिससे असली उद्देश्य की हानि होती है. अगर धार्मिक ढांचे में कुसंग्तियां हैं तो सिर्फ उन्हीं को सामने रखकर पूरी व्यवस्था का मखौल उडाने से क्या हासिल होगा. ब्रिटेन में बर्मिंघम के एक प्रोफेसर ने प्राचीन हिन्दू मन्दिरो को वेश्यालय करार दे दिया. जाहिर है कि किसी भी धर्म के बारे में ऐसी सतही चर्चा से बचना चाहिए. इससे अंधविश्वास नहीं मिटेंगे, नफरत बढ सकती है.

  4. आशीष Says:

    दोस्त यही तो खासीयत है हिन्दू धर्म कि ‘इसमे धर्म अर्थ काम….हर चिज को समान महत्व दिया गया है…. अति किसी भी चिज के बूरी होती है…..

    अब आपका विवेक ही निर्णय लेगा कि क्या अच्छा क्या बूरा….

    और हां किसी धर्म को जाने बिना उस पर अनावश्यक चर्चा करना टिप्पणी करना भी ठीक नही है, चाहे वह हिन्दूत्व हो, इसाईयत या इस्लाम …

  5. shiv kumar Says:

    i like

  6. Dr. Adhura Says:

    dharm na sex hai na hi mukti. jo ye paesan uthate hai vh dharm ke bare me ghyan nahi rakhate yam ka majak karte hai.satya dharm ek vghyan hai . jo galat nahi hai .sex ko dharm ke anusar karna chahiye .rahi bat bhagwan ki lila ki uska arth aghyani guru galat btate hai.isliye ye parsan aap ke dimak me aata hai ki bhagwan kare to lila hum kre to sex.lila ka vishya lamba hai isliye yaha nahi bta paunga. ialiye dharm na sex hai nahi mukti.

  7. mukesh kumar Says:

    dharm insan ko sahi raste par chalne ke liye banaya gaya he iswar se dar ka hi insan sahi raste par chalta he anyath insan batak jata he or galat kam karne lagta he

  8. mukesh kumar Says:

    sex insan ko godgift mela he duniya me koi bhi prany insan ke tarah 365 din sex nahi kar sakta he! or nahi koi prany iswar ke bhakti kar sakta he! insan ke siva to dharm or kam dono he insan ke liye jaruri he

  9. Jitendra_singh Says:

    पहली बात आप जिसे धर्म कहते है वह धर्म नही सम्प्रदाय है। धर्म तो सभी लोगोँ का एक ही होता है, और जो चीज अलग- अलग हो वह धर्म नही हो सकता। सभी लोग पानी को पानी कहते है आग को आग, तो मानव को मानव न कहकर क्योँ अलग- अलग धर्म का कहा जाता है। दूसरी बात धर्म सभी को सुखमय जीवन जीते हुए मुक्ति का रास्ता बताता है॥

  10. divya Says:

    apne joyeh prason uthaya hai to iska uttar aap kisi ek uttarse nahi pa sakte . iska uttar pane main apkojanmo lag jayenge. bhagwan ki lila usme
    satyta, vishwas,prem ,anubhuti thi. uski brabri to koi bhi nahi kar sakta. aamin

  11. rajput chandresh Says:

    hindu dharm duniya ke sabhi dharmo me srest tam dharm hai thik usi prakar jaise hindustan ek durlabh des hai ynh a aneko prakar ke log baste hai aneko bhasayen bolte hai anek ta hote huye bhi yahan ekta hai theek usi prakar hindu dhram hai aneko samprday aneko dharm kelogon ko apne me samaye huye hai

  12. girish chander Joshi Says:

    we can not compare sex and dharm together, sex is saperate and dharma is saperate

    hope u can respect your dharma,

    girish joshi
    nainital up

  13. SUDARSHAN JHA Says:

    MERE KHAYAL SE DHARAM KA SAWAL JAHAN TAK HAI KUCH LOG IS NAM SE FAYDA CHAHTE HAIN LEKIN SACH TO YAH HAI KI NA DHARAM KO SEX MANA JANA CHAHIYE NA MUKTIU JISE JO DHARAM PAR WISHWASH HO US DHARAM KA PALAN KARNA CHAIYE

  14. ramesh Says:

    dharm eak astha hai. hindu dharm mai sex[kaam] ko vasna kaha gaya hai.sex ko yahan yog kaha jata hai ,bhog nahi .maryada porvak jeevan jeena iska adhar hai.

  15. neeraj Says:

    धर्म के मुख्यतः दो आयाम हैं। एक है संस्कृति, जिसका संबंध बाहर से है। दूसरा है अध्यात्म, जिसका संबंध भीतर से है। धर्म का तत्व भीतर है, मत बाहर है। तत्व और मत दोनों का जोड़ धर्म है। तत्व के आधार पर मत का निर्धारण हो, तो धर्म की सही दिशा होती है। मत के आधार पर तत्व का निर्धारण हो, तो बात कुरूप हो जाती है।

    एक संत आता है। भीतर की गुफा में जाकर धर्म के तत्व अध्यात्म को जानता है। फिर वह चला जाता है। फिर मत बचा रहता है। उसके आधार पर एक संस्कृति विकसित होती है। संस्कृति के फूल खिलते हैं। काल क्रम में संस्कृति मुख्य हो जाती है। अध्यात्म गौण हो जाता है। और फिर एक संत को, एक जीवित संत को इस धरती पर आना पड़ता है। फिर से अंगारे जलाने होते हैं। फिर से दीप जलाना होता है।

    जो दीप कभी जला था, उसके आधार पर जो गीत रह गए थे, वे पुराने पड़ जाते हैं। फिर से एक नया दीपक जलता है। नई रोशनी आती है। नया गीत फूटता है। नई नदी बहती है। सब कुछ नूतन हो जाता है। तो कहूँगा कि तुम जानो या न जानो, तुम सब धर्म के मार्ग पर ही हो। कोई व्यक्ति ऐसा नहीं हैं, जो धर्म के मार्ग पर नहीं है।

    ND
    यह और बात है कि उसे पता है, या नहीं पता है। लेकिन धर्म का तत्व क्या है? धर्म का उद्गम क्या है? कहाँ पहुँचना है हमें? गंतव्य कहाँ है?

    उस बात को बताने के लिए ही संत इस धरती पर आता है। स्वामी विवेकानंद जी भी आए। और ये याद दिलाने के लिए आता है संत कि तुम कौन हो? ‘अमृतस्य पुत्राः।’ तुम राम-कृष्ण की संतान हो। तुम कबीर और गुरुनानक की संतान हो। तुम बुद्ध और महावीर की संतान हो। तुम क्यों दीन-हीन और दरिद्र जैसा जीवन जी रहे हो? क्यों अशांत हो, क्यों दुःखी हो? अपना स्वरूप हम भूल गए हैं। करीब-करीब ऐसे ही हम जीवन जीते हैं अपने वास्तविक स्वरूप को भूलकर।

    इस जीवन की कितनी गरिमा है। इस जीवन की कितनी क्षमता है। अनंत आनन्द का खजाना, जो हमारे भीतर है, उसकी ओर हम पीठ करके जीते हैं। महर्षि नारद की तरह फिर कोई संत आता है हमारे बीच। कभी बुद्ध, कभी महावीर, कभी कृष्ण, कभी राम, कभी गुरुनानक, कभी गुरु अर्जुनदेव, कभी दादू, कभी दरिया, कभी रैदास, कभी मीरा, कभी सहजो, कभी दया बनकर आता है और हमसे कहता हैं कि चलो! उस मानसरोवर को चलो, जहाँ से तुम आए हो।

  16. dr.amar jeet singh chandel Says:

    DHARM EK SADHANA HAI. YEH NA MUKTI KE LIYA HAI NA SEX KE LIYA.YAIH KEVAL JEEON MAI AAP NANE KE LIYA HAI

  17. Abhishek Rai Says:

    Baat to awashya karni chahiye.
    yadi prashna poochhne se kisi dharm ya astha ko chot pahuchti hai to wah chhadm hai..aur jaha tak mai janta hoon, jis dharm ne duniya ko adyatm, vigyan, chikitsa, darshan, vanijya, kala, jeevan ka tareekha aadi diye hon wo dharm chhadm nahi ho sakta. To fire yahi samajh me aata hai ki ise prastut karne wale logon me gyan ki vastvikta nahi hai tabhi to ve spathikaran ko pap batate hain.

    aap ne jo rahaslila aur sex ko corelater kiya hai uske bare me mai kahna chahta hoon ki aap ka tathakathit sex bhi lila kahlaega yadi aap 11yrs ki umr me ye karen jabki jananango ka vikas lagbhag 14yrs nyuntam me hota hai.

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