Archive for जून, 2007

ये है iPhone का क्रेज

जून 30, 2007

apple-iphone.jpg

अमेरिका में कल Apple ने अपने हाट प्रोडक्ट iPhone को लांच कर दिया। पहले दिन ही आई फोन की बिक्री एक लाख से ज्यादा हो गई है।
अगर इससे आप अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं तो यह लिंक देख लीजिए शायद कुछ अनुमान लग जाए। गूगल पर कल के दिन में अमेरिका में 100 सबसे ज्यादा हाट सर्च में 40 iPhone के लेकर सर्च किया गया है।

वैसे आई फोन के बारे में लिख रहा हूं तो कुछ मैं भी बता दूं। अभी यह केवल अमेरिका में AT & T सर्विस के लिए मिलेगा। वैसे कुछ लोगों को ने कहना शुरू कर दिया है कि इसकी सबसे तगड़ी प्रतियोगिता iPod से होगी। आई फोन में iPod के फीचर्स inbuilt हैं।

अगर हम भारतवासी इसका ख्वाब देख रहें हैं तो मैं आपकों एक कड़वी सच्चाई बता दूं कि जब अमेरिका वाले इसे फेंकने लगेंगे तब यह भारत में लांच किया जाएगा। 2009 में। मतलब कि भारत को कूड़ों से भर दो।

 Official website: iPhone

तबीयत खराब है

जून 29, 2007

आज मैं किसी और के बारे में नहीं अपने बारे में लिख रहा हूं। मेरी तबीयत खराब है। सब कह रहे हैं वायरल है। मुझे नहीं पता कि क्या है लेकिन इसको सुन कुछ याद आ रहा है।

रांची में मेरा जहां मकान है, वहां एक थर्मल स्टेशन है। पतरातू थर्मल पावर स्टेशन। पावर कट होता ही नहीं और जब होता है तो कुछ ही देर के बाद आ भी जाता है। अगर वहां पावर कट हुआ और आप किसी से पूछेंगे तो लोग कहेंगे ऊपर से कटा है। अब यह ऊपर कहां है कम ही लोगों को पता है। लेकिन यह जुमला बच्चे-बच्चे के जबान पर है। ठीक इसी तरीके से अगर आपको जुकाम और शरीर दर्द है तो यहां लोग छूटते ही कहेंगे वाइरल है।

खैर, मुझे किसी और बारे में लिखना था मैंने तबीयत खराब के बारे में लिख दिया। लगे हाथों एक और बात बता ही दूं। गांवों में अगर किसी बुजुर्ग की तबीयत खराब होती है तो वो कहता/कहती हैं, हे! गंगा मैया अब बुलाय ला।

I am not all that serious 🙂

आइए बॉस को जाने, साथ में एसपी सिंह को नमन

जून 27, 2007

एक बहुत पोपुलर टीवी विज्ञापन है। हरि साडू वाला। एच फार हिटलर..। याद आ गया। क्या बॉस का सही रूप यही है। बॉस, हर कोई त्रस्त रहता है। चाहे वह सरकारी दफ्तर हो या फिर प्राइवेट।

दफ्तर में बॉस एक होते हैं लेकिन हर कर्मचारी अपने से ठीक ऊपर वाले बॉस (सीनियर) से परेशान होता है। अपने सहकर्मी को तमाम तरीके के कमेंट देता रहता है, बॉस को लेकर। यार ऐसा है, वैसा है लेकिन एक बात है .. जानकार आदमी है। (जानकार नहीं होता तो वहां थोड़े ही बैठा होता)

लोगों की कोशिश होती है कि वह बॉस का जन्मदिन जाने और उसे शुभकामनाएं दे। सबसे पहले। इसे कहते हैं चाटुकारिता नीति।

बॉस और कर्मचारी विक्रम और बैताल की तरह से हैं। कर्मचारी हमेशा भागना चाहता है लेकिन ‘विक्रम’ हमेशा कर्मचारी को पकड़ लेता है। पूरी कहानी सुनता है। जवाब देता है और कर्मचारी फिर गोली देकर भाग निकलता है।

ऐसा नहीं है कि ‘विक्रम’ को नहीं पता कि बैताल भाग जाएगा। फिर भी वह उसे भागने के लिए एक-दो मौके दे देता है। आज का विक्रम पहले से कहीं ज्यादा चतुर और चालाक है।

बॉस को भी कर्मचारियों की गतिविधि जानने के लिए एक चाटुकार की जरूरत होती है। चाहे जो भी मिल जाए। समझदार बैताल या नासमझ बैताल। कहानी तो सुनाएगा ही।

लेकिन कई बॉस टीम में काम करने पर विश्वास रखते हैं। जैसे सुरेंद्र प्रताप सिंह, एसपी। आज उनके शिष्य सभी मीडिया संस्थाओं के मुखिया बन बैठे हैं लेकिन कोई अपने जैसा शिष्य नहीं बना पा रहा है। आज एसपी की दसवीं पुण्यतिथि है। उनको मेरा नमन।

मैंने यह लेख उनको याद करते हुए ही लिखा। आज जनसत्ता और अमर उजाला के संपादकीय पृष्ठ पर उनके बारे में विस्तार से लिखा है। अगर संभव हो तो पत्रकार ब्लागर पढ़ लें।

एक और स्टोरी मिली है । वेब दुनिया से जरा इसे भी पढ़ लें

क्या सही पहचान है बाल ठाकरे की: एक कार्टून

जून 27, 2007

Bal Thackrey and BJP

बाल ठाकरे किसी ज़माने में कार्टूनिस्ट थे आज उन पर यह कार्टून कितना सही बैठता हैसोलह आने सच, ये भाजपा की नियति है की उसका यह हाल हो रहा है 

ग्लोबलाइजेशन, नौजवान भारतीय और परिवार

जून 25, 2007

कल तक सचिन को लोग सचिन के नाम से ही जानते थे। उसका कोई पुकारू नाम भी नहीं था। आज सचिन स्वयं लोगों को अपना ‘जॉन केली’ बताता है। सचिन गुड़गांव के एक काल सेंटर में काम करता है। उम्र 21 साल। पिता ‘म्यूनिसिपल कोरपोरेशन आफ दिल्ली’ (एमसीडी) में काम करते हैं। जितनी सैलरी पिता को मिलती है उससे 3 हजार ज्यादा सचिन कमाता है। उनके पिता पूर्वी उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से हैं। सचिन का जन्म दिल्ली में ही हुआ है।

(यह एक प्लाट है। जो मैं रोज देखता हूं। मैंने सोचा कि कुछ लिखूं और आज लिख रहा हूं। सारे किरदार काल्पनिक हैं)

आज के नैसर्गिक गुणों वाले हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1993 में जो बजट पेश किया उसका प्रभाव आज पित्जा हट, न्यूमरो यूनो, मैक डोनाल्ड, कैंटा बिल व अन्य ब्राडों के रूप में हमारे सामने है।

सचिन को पित्जा हट का पित्जा नहीं पसंद है। उसे जब भी पित्जा खाने की इच्छा होती है वह डोमिनोज से पित्जा को आर्डर देता है। शौक से वह कुर्ता पहनता है लेकिन ब्रांडेड। साथ में लिवाइस का डेनिम। लोगों से मिलने पर हाई और जाने पर सि या कहता है।

यह सब चीजें उसने ना तो स्कूल-कालेज में सीखी हैं और ना ही घर में। जिस कंपनी में वह काम करता है वहां का माहौल उसे यह सब सिखा रहा है।

भारत में 25 से 35 साल के उम्र की आबादी का हिस्सा 53 फीसदी है। इसका मतलब की आधी से ज्यादा जनसंख्या युवा है।

अब सचिन डेटिंग के लिए जाता है। लेकिन छुप-छुप कर। आज भी भारत में प्यार को सार्वजनिक रूप में कहने से लोग हिचकते हैं। वीकेंड कल्चर ने लोगों के मस्ती करने का ढंग बदला है। पहले लोग घर में कैरम बोर्ड और सांप-सीढ़ी खेलते हैं और आज कोंट्रा-मारियो के एडवांस्ड वर्जन बाजार में मौजूद हैं। फिर हर दस किलोमीटर में एक मल्टीप्लेक्स।

पूजा के नाम पर महिलाएं अपने घरों में बने मंदिर में पूजा करतीं हैं। या फिर अपनी सैंट्रो कार और लकदक साड़ी में सजकर मंगलवार शाम को अक्षरधाम मंदिर में जाती है।

इस ग्लोबलाइजेशन ना जाने कितने डे (दिवस) बना दिए। इसका श्रेय जितना यश चोपड़ा को जाता है उतना ही प्रधानमंत्री को भी जो कभी वित्त मंत्री थे।

शशि कपूर का एक फेमस डायलग है। ‘मेरे पास मां है।’ तो पहले मदर्स डे आया है। लेकिन अब फादर्स डे भी कतार में खड़ा है। रोज डे, वैलेंटाइंस डे ने ग्लोबलाइजेशन में बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद और शिव सेना को भी लाइम लाइट में ला दिया। हमारे देश में खजुराहो और अजंता-एलोरा बहुत पहले से हैं। इस पर यह शान बघारते हैं और वैलेंटाइंस डे पर डंडा।

किसी ने कहा है कि जहां भी संस्कृति का क्षरण हो रहा हो तो समझो कि वहां विकास आने वाला है। भारत भी विकसित राष्ट्र बनने वाला है।

इस लेख से कोई भी असहमत हो सकता है। असहमत होने वालों से दो बातें कहूंगा। पहला कि आप कभी गुड़गांव और नोएडा के इन कॉल सेंटरों के चक्कर लगाएं दूसरा कि अगर आप वहीं काम करते हैं और असहमत हैं तो Exception is Everywhere

यूट्यूब: वंदे मातरम और उसमे दिए गए कमेंट

जून 24, 2007

रविवार का दिन, काम का दवाब कम होता है । यूट्यूब खोल विडो देखने लगाइस विडो को देख मेरा रोम रोम रोमांचित हो जाता हैसोचा आज इसे अपने ब्लोग पर भी दाल दूजरा इस विडो पर दिए गए 96 कमेंट पर भी नजर डालिये

यूपी सीपीएमटी और तीसरा मोर्चा : एक कार्टून

जून 23, 2007

UP CPMT and third front

आपसी मंत्रणा चल रही है कि कैसे जीता जायेइस कार्टून को देख कर वो चुटकुला याद गया कि मैं कोई भी मैच जीत सकता हु केवल मुझे पाकिस्तानी UMPIRE दे दीजिए 🙂  🙂  🙂

सुनीता को मिलेगा ‘भारत रत्न’!

जून 23, 2007

सुनीता के धरती पर उतरते ही जो पहला अवार्ड उन्हें मिला वह है ‘पर्सन आफ द वीक’। एबीसी न्यूज चैनल ने सुनीता को यह अवार्ड देते हुए कहा कि जो महान कार्य सुनीता व उसके साथी अंतरिक्ष यात्रियों ने की है उसके लिए बधाई।

अब बारी है भारत सरकार की। पिछला भारत रत्न मिला था शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्ला खां। सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका के ओहायो में हुआ है लेकिन सुनीता को भारत से काफी लगाव है। जब वह छह महीने पहले अंतरिक्ष में जा रही थी उस समय अपने साथ गणोश की एक मूर्ति और समोसे ले गई थीं।

सुनीता के काम ने उनका कद इतना बड़ा तो कर ही दिया है कि भारत सरकार को यह घोषणा करते हुए फक्र महसूस करना चाहिए। सुनीता अमेरिका और भारत से ऊपर उठकर सारे विश्व की है।

इससे पहले भी ऐसा हो चुका है जब अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था तो उन्हें भारत के कोई भी नागरिक सम्मान नहीं मिला था। भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था।

सुनीता विलियम्स को लेकर मेरा भी एक अनुभव है, जो मैं यहां बताना चाहूंगा। मैं अपने खाली समय में विकिपीडिया अंग्रेजी के लिए संपादन करता रहता हूं। तो हुआ यूं कि विकिपीडिया की नीति के अनुसार अगर किसी भी व्यक्ति का लेख बनाया जाता है तो उसके नाम उन विभिन्न भाषाओं में लिखे जाते हैं जिससे संबंधित व्यक्ति जुड़ा हुआ है। मसलन शिल्पा शेट्टी के लेख में उनका नाम हिन्दी के अलावा मराठी से भी लिखा जाएगा क्योंकि वह वहां की हैं।

ठीक उसी प्रकार से सुनीता विलियम्स के लेख में मैंने उनका नाम हिंदी से लिख दिया। दूसरे दिन किसी ने उनका हिंदी का नाम हटा दिया। मैंने उस बंदे के पेज पर जाकर पूछा कि आपने क्यों हटा दिया क्योंकि मैंने हिंदी में इसलिए लिखा था चूंकि वह भारतीय मूल की हिंदी है और भारत की राजभाष हिंदी है। कुछ बहस-मुबाहिसों के बाद मेरी जीत हुई और उनका नाम मैंने हिंदी में रहने दिया।

ठीक इसी तरीके की जीत तभी होगी जब हम सब मिलकर कहेंगे कि सुनीता विलियम्स को भारत रत्न मिलना चाहिए।

सुनीता को मिलेगा ‘भारत रत्न’!

जून 23, 2007

सुनीता के धरती पर उतरते ही जो पहला अवार्ड उन्हें मिला वह है ‘पर्सन आफ द वीक’। एबीसी न्यूज चैनल ने सुनीता को यह अवार्ड देते हुए कहा कि जो महान कार्य सुनीता व उसके साथी अंतरिक्ष यात्रियों ने की है उसके लिए बधाई।

अब बारी है भारत सरकार की। पिछला भारत रत्न मिला था शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्ला खां। सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका के ओहायो में हुआ है लेकिन सुनीता को भारत से काफी लगाव है। जब वह छह महीने पहले अंतरिक्ष में जा रही थी उस समय अपने साथ गणोश की एक मूर्ति और समोसे ले गई थीं।

सुनीता के काम ने उनका कद इतना बड़ा तो कर ही दिया है कि भारत सरकार को यह घोषणा करते हुए फक्र महसूस करना चाहिए। सुनीता अमेरिका और भारत से ऊपर उठकर सारे विश्व की है।

इससे पहले भी ऐसा हो चुका है जब अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था तो उन्हें भारत के कोई भी नागरिक सम्मान नहीं मिला था। भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा था।

सुनीता विलियम्स को लेकर मेरा भी एक अनुभव है, जो मैं यहां बताना चाहूंगा। मैं अपने खाली समय में विकिपीडिया अंग्रेजी के लिए संपादन करता रहता हूं। तो हुआ यूं कि विकिपीडिया की नीति के अनुसार अगर किसी भी व्यक्ति का लेख बनाया जाता है तो उसके नाम उन विभिन्न भाषाओं में लिखे जाते हैं जिससे संबंधित व्यक्ति जुड़ा हुआ है। मसलन शिल्पा शेट्टी के लेख में उनका नाम हिन्दी के अलावा मराठी से भी लिखा जाएगा क्योंकि वह वहां की हैं।

ठीक उसी प्रकार से सुनीता विलियम्स के लेख में मैंने उनका नाम हिंदी से लिख दिया। दूसरे दिन किसी ने उनका हिंदी का नाम हटा दिया। मैंने उस बंदे के पेज पर जाकर पूछा कि आपने क्यों हटा दिया क्योंकि मैंने हिंदी में इसलिए लिखा था चूंकि वह भारतीय मूल की हिंदी है और भारत की राजभाष हिंदी है। कुछ बहस-मुबाहिसों के बाद मेरी जीत हुई और उनका नाम मैंने हिंदी में रहने दिया।

ठीक इसी तरीके की जीत तभी होगी जब हम सब मिलकर कहेंगे कि सुनीता विलियम्स को भारत रत्न मिलना चाहिए।

मैं तुझे मीर कहूं, तू मुझे गालिब

जून 22, 2007

इस जुमले के बारे में आप लोगों को तो खूब पता होगा। यह एक तरीके की मार्केटिंग है। ‘मैं तुझे मीर कहूं, तू मुझे गालिब’।

रजनीकांत ने शिवाजी फिल्म के रीलीज के बाद उठे एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि अमिताभ बच्चन भारतीय सिनेमा के ‘शहंशाह’ है। उन्होंने कहा था, Yes i am the King but he is Emperor.

अब बारी थी अमिताभ बच्चन की, उन्होंने रजनीकांत के इस बयान पर एक पत्रकार को कहा कि रजनीकांत ही असल ‘शहंशाह’ हैं। अमिताभ के बोल थे, ‘Rajni is phenomenal. The largest, the best and truly the boss! It is ridiculous to compare me with him।

अब यह बहस तो बड़ी देर तक चलती रहेगी कि दोनों में से सचमुच बड़ा कलाकार कौन है। रजनीकांत, जो एक टैक्सी ड्राइवर से यहां तक पहुंचे या अमिताभ जिनकी बीमारी पर मंदिरों के बाहर भीड़ लंबी हो जाती है।

वैसे दोनों अपनी-अपनी जगह महान हैं।