सावधान! कापीराइट, पेटेंट और आईपीआर से भूचाल आएगा

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लोगों की बौखलाहट बढ़ेगी और यह तब तक बढ़ेगी जब तक इसे समझ नहीं लिया जाएगा। विदेशों में लोग इसके प्रति जागरूक हो रहे हैं या यू कहें हो चुके हैं। लेकिन हम भारतीयों की स्थिति इन मामलों में थोड़ी गंभीर है।

कापीराइट, ट्रेड मार्क, पेटेंट। अगर आपका काम रचानात्मक है, मसलन लिखना, पढ़ाना, पेंटिग, गाना गाना तो फिर आप को इनकी समझ जरूर होनी चाहिए। पता चला कल को आप चिल्ला रहे हैं कि यह मेरा है लेकिन कुछ कर नहीं पाएंगे। मतलब कि कोर्ट में केस हार जाएंगे।

आप लोगों ने सुना ही होगा बासमती चावल, करेला, हल्दी, योग के कई आसन अमेरिका में पेटेंट हो रहे हैं मतलब साफ है इन सब चीजों का कोई अब व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।

गाने की कापीराइट के बारे में आप जानते हैं या नहीं मुझे नहीं पता लेकिन अगर आप अपने जन्मदिन की पार्टी में घर पर ही 50 लोगों के सामने ‘आई एम ए डिस्को डांसर’ बजा रहे हैं तो एचएमवी वाले आप पर केस कर सकते हैं। यह गाना उन्होंने कापीराइट करा रखी है। कंपनी ने केवल कैसेट, सीडी, डीवीडी आपको अपने सुनने के लिए बेची है ना कि पूरे मोहल्ले को सुनाने को। सो सावधान! जानकारी बढ़ाइये

ज्यादा जानकारी के लिए वीकिपीडिया की यह लिंक देख लीजिए।

4 Responses to “सावधान! कापीराइट, पेटेंट और आईपीआर से भूचाल आएगा”

  1. Sanjeeva Tiwari Says:

    बहुत अच्छी जानकारी दिया है भाई आपने . मैं इस सम्बंध मे एक और जानकारी दे दूं मै होटल व्यवसाय से भी जुडा हुं विगत दीपवली में मुझे व अंय सितारा होटलो को मुम्बई की एक कंपनी से पत्र आया था जिसमे हमें स्पष्ट हिदायत दी गई थी कि हम अपने होटलो मे शादी पार्टी, जनम दिन पार्टी और व्यवसायिक मीटिगों मे कोई भी गाने व गानो के धुन नही बजायेगे ना ही गानो को किसी आर्केस्ट्रा या अंय माध्यमो से सार्वजनिक करेंगे । यदि हम एसा करना चाहते है तो हमे उस कम्पनी को पैसा देकर अनुमति लेनी होगी । यह पत्र हमे भारत के होटल व रेस्टारेंट असोसियेशन के मध्यम से भेजा गया था और अनुरोध किया गया था कि इसका पालन हो । बहुत सारे होटल व्यवसायी इसे हसी खेल मे ले रहे है पर यह सिकंजा कसाने वाला है । अभी भारत मे बौधिक सम्पदा कानून मे जागरूकता का कल्ला फूटा है हमे इसका आदर करना चाहिये ।

  2. श्रीश शर्मा Says:

    विकीपीडिया की कौन सी लिंक देखनी है, लिंक तो है ही नहीं कोई?

  3. अनूप शुक्ल Says:

    उड़ी बाबा!

  4. sanjay tiwari Says:

    पेटेंट कानूनों के बारे में हम लोगों को बहुत कम जानकारी है. और अब चाहकर भी कुछ हो नहीं सकता क्योंकि पेटेंट कानूनों में जरूरी और लाभकारी बदलाव कंपनियां पहले ही करा चुकी हैं. अगले कुछ सालों में इन्हीं पेटेन्ट कानूनों का सहारा लेकर कंपनियों का शिकंजा आम आदमी पर कस जाएगा. जैसा कि एक भाई ने अपने होटल के बारे में एक अनुभव लिखा है. ये कानून इतने सख्त हैं कि इन्हें किसी भी भारतीय अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती.

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