30 साल का हुआ लाल झंडा

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CPI flag

हमारे देश के अच्छे राष्ट्रपति कलाम ने एक बार कहा कि भारत में द्विदलीय प्रणाली होनी चाहिए। ये हल्ला, वो हल्ला। शिवसेना ने इस पर कुछ नहीं बोला। लेकिन जो आज उन्हें दूसरी पारी के लिए सबसे उपयुक्त बता रहे हैं, उन्होंने उनकी भद्द कर दी थी।

खैर भारत के दो सबसे बड़े राजनीतिक दलों की बात करें तो उन्होंने जो भारत को दिया है वह सब जानते हैं। 60 साल के जवान भारत में इतने घोटाले हो गए कि भारत ‘सपेरों के देश’ से ‘घोटालों का देश’ बन गया। इसके बाद तो स्टिंग आपरेशनों का ऐसा दौर चला कि क्या कांग्रेस, भाजपा, राजद, राजग.. सब के सब एक ही प्लेटफार्म में खड़े थे। हर नेता डूब जाना चाहता है, आकंठ तक, पैसे के।

इस बीच लाल झंडा पिछले 30 सालों से एक छत पर लहरा रहा है, जो अब तक नहीं उतरा। एक बार को लगा कि शायद अब लोगों की तंद्राएं टूटेंगीं लेकिन फिर से लाल झंडे को पूर्ण बहुमत। बाद में पता चला कि वह तंद्रा नहीं थी। पश्चिम बंगाल के लोग जागते रहते हैं।

राजनीति में विपक्षी पार्टी का चुनाव में हारने के बाद एक जुमला काफी फेमस है, ‘चुनाव में भारी गड़बड़ी हुई है।’ मुझे इसपर हंसी आती है।

इन सभी के बीच इन वामपंथियों का जो एक चेहरा बराबर बना रहा है वह है विरोध का। जिस प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का इन लाल खेमावालों ने विरोध किया उस मामले में पश्चिम बंगाल देश में चौथे स्थान पर है। लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब के आधार पर। तो फिर का ढोंग कैसा?

किसी साक्षात्कार में बुद्धदेब चटर्जी ने कहा कि जिस हर्बल हब को बंगाल सरकार ने हासिल किया है उसे लेने के लिए पांच राज्यों की सरकार लगी थी। हमें मिला, यह हमारे लिए एक जीत है।

खैर, इनसब के बीच बंगाल में सरकार अपने तीस साल की उपलब्धियां गिना रहीं है और विरोधी अपना दायित्व उनका विरोध कर निबाह रहे हैं। लेकिन बंगाल में लाल झंडा बड़ी शान से लहरा रहा है और उसकी लहर दिल्ली तक पहुंची है।

3 Responses to “30 साल का हुआ लाल झंडा”

  1. राजीव रंजन प्रसाद Says:

    माफ करें..मेरी असहमति है। लालू भी लंबा राज कर गये और मुशर्रफ भी अभी लम्बे कुर्सी पर रहेंगे। सद्दाम नें भी सालों राज किया…….क्या पाया है इस लाल से देश ने? केवल बंगाल जगता है और सारे देश में वैचारिक अंधे हैं…??? गठबंधन आज राजनीतिक जरूरत है इसी लिये लाल सारे देश में सुना जा रहा है (आजादी को तीस साल के दुगुने हो गये)।

  2. Rajesh Roshan Says:

    एक चुटकुला सुनाता हू, एक बात सही है तो दुसरी झूठी । मैं ३० साल तक रहता तो तो ना जाने कितने घोटाले कर देता एक ये हैं घोटाले का केवल विरोध करना जानते हैं । मुझे पता है बहुत बुरा चुटकुला है लेकिन सच है🙂 🙂

  3. sanjeev kumar sinha Says:

    राजीव रंजन प्रसादजी से अपनी सहमति जताता हूं। 30 साल के मार्क्सवादी शासन के बाद पश्चिम बंगाल को क्या मिला…भय, भूख, बेरोजगारी, बदहाली….। नंदीग्राम और सिंगूर में किसानों के खून से होली खेलने वालों का शासन नहीं चाहिए।

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