आईडेंटिटी क्राइसिस: राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों से एक मुलाकात

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स्कूल में सबको पढ़ाया बताया जाता रहा कि बड़ा सपना देखो, बड़े बनोगे। लेकिन सुनता ही कोई नहीं। मैं सुनता था सो मैंने मेरा सपना नाम से ब्लाग बना लिया और जो मुझसे भी बड़ा सपना देखते थे उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन भर दिया। एक नजर..

वकील, दर्जी, बढ़ई, बीमा एजेंट सब के सब लगे पड़े हैं राष्ट्रपति बनने के लिए। अपनी कमाई का 15 हजार भी उन्होंने नामांकन शुल्क भी भर दिया है। कोई भ्रष्टाचार दूर करने के लिए राष्ट्रपति बनना चाहता है तो कोई अफजल को फांसी देने के लिए।

दिल्ली के एक सज्जन हैं तीन बार स्नातकोत्तर कर चुके हैं। एलएलबी की भी डिग्री है। कांग्रेस और भाजपा दोनों को पूंजीवादी पार्टी मानते हैं। पिछली बार इनका नामांकन वैध नहीं पाया गया था और इस बार भी नामांकन वैध नहीं पाया गया है।

राष्ट्रपति बनने के लिए 84 लोगों ने नामांकन भरा था लेकिन अफसोस 82 लोगों के नामांकन वैध नहीं पाये जाने से रद्द कर दिया गया है। क्या यह सारे लोग सनकी हैं। पता नहीं शायद ऊंचा ख्वाब और अपनी पहचान के लिए तरसते हैं। इनको पहचान चाहिए। आईटेंटिटी क्राइसिस।

2 Responses to “आईडेंटिटी क्राइसिस: राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों से एक मुलाकात”

  1. kripal Says:

    India is free you can also try may be🙂 tukka lag jaye

  2. समीर लाल Says:

    कुछ के लिये सनक, कुछ के लिये पिनक और कुछ के लिये विरोध दर्ज करने का तरीका-बस यही सोचा जा सकता है इस तरह के नामांकनो के लिये.

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