मजेदार चोरी

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यह कैसे हो सकता है! यही पूछेंगे ना आप कि चोरी कैसे मजेदार हो सकता है? लेकिन मेरे लिए यह मजेदार ही है। सच में मजेदार..।

मेरे पास एक बाईक है और उसे झाड़ने पोंछने के लिए मैं उसमें एक कपड़ा रखता हूं, जैसे सभी रखते हैं। जब भी मैं किसी पब्लिक पार्किग में गाड़ी खड़ी करता हूं कोई ना कोई मेरे उस गंदे कपड़े को ले उड़ता है। मैं जब गाड़ी के पास जाता हूं तो अपने गाड़ी में रखे कपड़े को ना पाकर बगल की गाड़ी के रखे कपड़े को ले उड़ता हूं।

जब कपड़ा निकालता होता हूं तो डर लगता रहता है कि कहीं गाड़ी का मालिक आकर मुझे ये ना कहे कि क्यों भाई मेरा क्यों निकाल रहे हो। कहीं और से जुगाड़ कर लो।

तो है ना यह मजेदार चोरी।

8 Responses to “मजेदार चोरी”

  1. जगदीश भाटिया Says:

    वाकई मजेदार:)

  2. Sudhir Srivastava Says:

    You are right. Meree saath bhi aisa hota hai. Lekin main kisi ka kapda nikalne ke bajaye ab ek extra roomal packet me rakhta hoo……..

  3. Rajesh Roshan Says:

    सुधीर जी आप अच्छा करते हैं लेकिन गन्दा कपड़ा जेब रखना…! मेरा एक दोस्त इससे बचने के लिए अपनी गन्दी जुराबे रखता है🙂

  4. सागर चन्द नाहर Says:

    🙂

  5. Ravindra Ranjan Says:

    बहुत सही कहा आपने। हम भी कई बार इस अनोखी चोरी के शिकार हो चुके हैं।

  6. Pramendra Pratap SIngh Says:

    मजेदार

  7. समीर लाल Says:

    🙂 हा हा!!

    अच्छा है मंदिर में आपके जूते नहीं चोरी हुए वरना आप तो किसी और के ले उडते.🙂

  8. Amit Says:

    लो, कल्लो बात! भई अब अपने साथ न ऐसा वाक्या होता है और न ही हम किसी और के साथ ऐसा करते हैं। पहली बार जब ऐसा हुआ तो उसके बाद से सीट के नीचे कपड़ा रखना शुरु कर दिया, और सीट पर लग जाता है ताला, तो न कपड़ा चोरी होता है और न ही मेरे को किसी और का चुराना पड़ता है!😉

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