Archive for the ‘Celebrity’ Category

इसे कहते हैं बेजोड़ तालमेल

अक्टूबर 10, 2007

एक गाना लेकिन गाने वाले दो. दोनों अपने जगह महान. जिस किसी ने भी इन दोनों गानों को मिलाया है एक अच्छी सोच और अच्छा काम. बेहतरीन, लाजवाब आप इसे सुनिये और अच्छा न लगे ऐसा हो नही सकता. मैंने इस गाने को जहा से लिया है केवल उसका कला पक्ष है की अपलोड करने वाले की आइद है गुरू ऑफ़ सेक्स. उसके बावजूद मैं इतने अच्छे काम के लिए उसे बधाई देना चाहूँगा

ये केवल महान नुसरत फतह अली खान की आवाज में

और ये लता मंगेशकर की आवाज में

‘मेरा भारत परेशान’ से ‘मेरा भारत महान’ तक

अगस्त 5, 2007

भारत के आम नागरिकों की राय है यह। कोई भारत से परेशान है तो कोई भारत को महान कहता है। आम भारतीय वर्तमान में जीता है। इन्हें भूत और भविष्य से कोई मतलब नहीं। हड़ताल में यह परेशान होता है। और ज्यादा मजदूरी मिलने पर खुश हो जाता है।

आज का भारत 60 साल का नौजवान भारत है। इसकी रफ्तार से हर कोई अचंभित है। देशी विदेशी सभी इसके तारीफ कर रहे हैं। अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर भारत से ज्यादा उत्सुक है।

टाइम ने अपने वर्तमान अंक में भारत की तारीफ की है। आजादी के 60 साल पूरे होने पर टाइम ने भारत पर विशेषांक प्रकाशित किया है। टाइम से पहले कई और विदेशी अखबारों और चैनलों ने भारत की ओर नजरें इनायत की हैं (इसे देख लें)

मेगास्थनीज, इब्नबतूता, फाहियान, ह्वेन स्वांग ने भारत की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं। सभी भारत की ओर ही ताक रहें हैं। विकिपिडिया पर किसी देश के पेज को पढ़ने में अमेरिका के बाद भारत के पेज का नंबर है। भारत और भारत की चीजें आज विश्व भर में लोकप्रिय हो रहीं हैं। लंदन में पनीर टिक्का की बिक्री बर्गर के करीब-करीब है। विदेशी महिलाओं को साड़ी में काफी पसंद है।

आज से बीस साल पहले टाटा और बिड़ला भारत में भारत के सबसे बड़े ब्रांड एंबेस्डर थे। टाटा-बिड़ला सभी के जुबान पर थे। यही हाल आज पूरे विश्व का है। आईटी, स्टील, फिल्म और साहित्य में भारत का परचम अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और खाड़ी देशों पर लहरा रहा है।

कोरस को खरीदने की भारी भरकम डील की खबर हो या अरुंधति राय व अनिता देसाई को बुकर पुरस्कार मिलने की खबर। हम आगे बढ़ रहे हैं। धीरे-धीरे। सपेरों के देश से अमीरों के देश बनने की कहानी भी दुनिया वाले आंखें फाड़-फाड़ कर देख और पढ़ रहे हैं। विदेशियों की रुचि पौराणिक योग में भी बढ़ी है।

क्रमश:

‘मेरा भारत परेशान’ से ‘मेरा भारत महान’ तक

अगस्त 5, 2007

भारत के आम नागरिकों की राय है यह। कोई भारत से परेशान है तो कोई भारत को महान कहता है। आम भारतीय वर्तमान में जीता है। इन्हें भूत और भविष्य से कोई मतलब नहीं। हड़ताल में यह परेशान होता है। और ज्यादा मजदूरी मिलने पर खुश हो जाता है।

आज का भारत 60 साल का नौजवान भारत है। इसकी रफ्तार से हर कोई अचंभित है। देशी विदेशी सभी इसके तारीफ कर रहे हैं। अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर भारत से ज्यादा उत्सुक है।

टाइम ने अपने वर्तमान अंक में भारत की तारीफ की है। आजादी के 60 साल पूरे होने पर टाइम ने भारत पर विशेषांक प्रकाशित किया है। टाइम से पहले कई और विदेशी अखबारों और चैनलों ने भारत की ओर नजरें इनायत की हैं (इसे देख लें)

मेगास्थनीज, इब्नबतूता, फाहियान, ह्वेन स्वांग ने भारत की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं। सभी भारत की ओर ही ताक रहें हैं। विकिपिडिया पर किसी देश के पेज को पढ़ने में अमेरिका के बाद भारत के पेज का नंबर है। भारत और भारत की चीजें आज विश्व भर में लोकप्रिय हो रहीं हैं। लंदन में पनीर टिक्का की बिक्री बर्गर के करीब-करीब है। विदेशी महिलाओं को साड़ी में काफी पसंद है।

आज से बीस साल पहले टाटा और बिड़ला भारत में भारत के सबसे बड़े ब्रांड एंबेस्डर थे। टाटा-बिड़ला सभी के जुबान पर थे। यही हाल आज पूरे विश्व का है। आईटी, स्टील, फिल्म और साहित्य में भारत का परचम अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और खाड़ी देशों पर लहरा रहा है।

कोरस को खरीदने की भारी भरकम डील की खबर हो या अरुंधति राय व अनिता देसाई को बुकर पुरस्कार मिलने की खबर। हम आगे बढ़ रहे हैं। धीरे-धीरे। सपेरों के देश से अमीरों के देश बनने की कहानी भी दुनिया वाले आंखें फाड़-फाड़ कर देख और पढ़ रहे हैं। विदेशियों की रुचि पौराणिक योग में भी बढ़ी है।

क्रमश:

रोलिंग के हाथों में जादू है

जुलाई 21, 2007

मैंने हैरी पाटर के छह किताबें पढ़ी हैं। पहले की चार हिंदी में बाकी के दो अंग्रेजी में। मेरी अंग्रेजी इतनी अच्छी भी नहीं है लेकिन यह जे के रोलिंग के हाथों का जादू है कि मैं उन किताबों को पढ़ पाया।

जिन्होंने भी हैरी पाटर नहीं पढ़ी है उसके बारे में यही कहा जा सकता है कि वो सारे ‘मगलू’ हैं। अगर आप मगलू नहीं जानते तो पढ़े हैरी पाटर सीरीज।

वैसे आज के दिन क्या हिंदी और क्या अंग्रेजी पूरे विश्व में हैरी पाटर छाया हुआ है। आप मजमून देख लीजिए। हमारे टीवी चैनल जिनको बाबा और सांप से फुरसत नहीं मिलती है आज सुबह वह भी पाटर मानिया से अभिभूत दिखे।

Harry Potter in Wikipedia

JK Rowling official website

शिल्पा शेट्टी को डाक्टरेट और गांधी जी से तुलना

जुलाई 20, 2007

Shilpa shetty

मेरे साथ काम करने वाले मेरे एक वरिष्ठ सहयोगी ने कहा क्या किसी को भी डाक्टरेट दिया जा सकता है? उनका यह सवाल शिल्पा शेट्टी को लंदन की लीड्स विश्वविद्यालय द्वारा डाक्टरेट की मानद उपाधि देने पर था।

मैंने छूटते ही कहा क्यों लंदन में उसने जो लड़ाई लड़ी यह उसका पुरस्कार है। शिल्पा शेट्टी आज लंदन ही नहीं पूरे ब्रिटेन में सबसे चर्चित शख्सियतों में से एक है।

‘बिग ब्रदर’ में ना जाने शिल्पा को क्या-क्या कहा गया और उसने उसका जिस तरीके से सामना किया वह काबिले तारीफ है। साथ ही मैंने कहा अगर शिल्पा ने कोई बड़ा काम नहीं किया है तो फिर गांधी जी भी कोई बड़ा काम नहीं किया है। क्या किया उन्होंने? अपने देश को अंग्रेजों से छुड़वाया। भई अगर अपनी चीज आप किसी से लेते हैं या तो फिर आपने कोई बड़ा काम थोड़े ही किया है।

पहले शिल्पा शेट्टी के बारे में कुछ। उन्हें ‘बिग ब्रदर’ में शामिल होने के लिए 31.5 मीलियन डालर मिले। यह उनका व्यावसायिक डील था। शिल्पा शेट्टी ने प्रोग्राम शुरू होने के बाद चार दिनों तक नहाया नहीं क्योंकि बाथरूम में कैमरा लगा हुआ था। उन्हें अपनी पब्लिशिटी से ज्यादा अपनी संस्कृति की ज्यादा फिक्र थी। या फिर अपनी इज्जत की तो कम से कम थी ही। उसके बाद उन्हें जो कहा गया वह आप इस लिंक में देख सकते हैं।

शिल्पा ने बिग बास के शुरुआत में ही कहा था कि इसमें जीतने के उन्हें शून्य फीसदी आशा है, मेरे लिए सबसे बड़ी चीज होगी अपने सम्मान और संस्कृति को बचा कर रखना।

अब जरा गांधी जी की बात। गांधी जी के पिता करमचंद गांधी पोरबंदर के दीवान थे। बचपन में पढ़ने लिखने में अच्छे ना होने के बावजूद गांधी जी को 18 साल की छोटी आयु में विदेश पढ़ने के लिए भेजा गया। उस समय जब लोग अपने शहर से दूसरे शहर नहीं जा पाते थे। गांधी जी का पहनावा किसी राजकुमार से कम नहीं होता था। लेकिन फिर भी दूसरे देश दक्षिण अफ्रीका में पहले उन्हें सिर से पगड़ी हटाने के लिए कहा गया और बाद में ट्रेन के फ्रस्र्ट क्लास के कोच से धक्का देकर निकाल दिया गया।

मेरे विचार से गांधी जी सौ फीसदी सुधारवादी व्यक्ति थे। जब तक उन्होंने कोट और टाई पहना कोट और टाई की बड़ाई करते रहे। जब उन्होंने धोती पहनना शुरू किया धोती के लाभ गिनाने लगे।

गांधी जी ने भी अपना आत्मसम्मान और संस्कृति नहीं जाने दिया। ठीक वही काम शिल्पा शेट्टी ने लंदन के रियलिटी शो ‘बिग ब्रदर’ में किया।

अमिताभ बच्चन सत्तर के दशक में इसलिए पोपुलर हुए कि उन्होंने ऐसी फिल्मों में अभिनय किया जो आम युवाओं से मिलती थी। परेशान युवा को हर कोई सताने वाला होता था बचाने वाला कोई नहीं। और उन फिल्मों को देख तब का युवा मन अमिताभ को अपने से जोड़ता था।

आज लंदन में रहने वाले भारतीय व एशियाई मूल के लोग भी शिल्पा शेट्टी से अपने को जोड़ कर देख रहे हैं। शिल्पा ने पहले तो यह काम पैसों के लिए जरूर किया लेकिन बाद में प्रोग्राम के दौरान पैसा गौण हो गया। अपना आत्मसम्मान सर्वोच्च हो गया।

हमें लोगों की प्रशंसा हृदय से करनी चाहिए। अगर उसने सच में अच्छा काम किया है तो।

मेरा सच में मानना है कि शिल्पा शेट्टी ने जो काम किया उसका प्रभाव जरूर गांधी जी के द्वारा किए गए दक्षिण अफ्रीका के काम से कम हो लेकिन काम दोनों एक ही है।

‘Shakira’ कीवर्ड पर एक दिन में 221 हिट

जुलाई 13, 2007

कल मैंने कोई पोस्ट नहीं लिखी थी। और आज सुबह देखता हूं कि अंग्रेजी कीवर्ड Shakira से मेरा सपना में 221 हिट हैं। मैं तो पहले समझ ही नहीं पाया कि ये क्या हुआ? शकीरा, 221, एक दिन में। कोई आइडिया नहीं। फिर पता चला कि icq.com पर इमेज सेक्सन में शकीरा सर्च करने पर मेरा सपना में डाली गई एक इमेज आती है। सारे लोग वहीं से आ रहे हैं। खैर आएं देखें।

पहले भारत गोल्बल हुआ, उस गोल्बल भारत में शकीरा आई और अब मेरा सपना गोल्बल हो रहा है। पोस्ट देखें।

‘Shakira’ कीवर्ड पर एक दिन में 221 हिट

जुलाई 13, 2007

कल मैंने कोई पोस्ट नहीं लिखी थी। और आज सुबह देखता हूं कि अंग्रेजी कीवर्ड Shakira से मेरा सपना में 221 हिट हैं। मैं तो पहले समझ ही नहीं पाया कि ये क्या हुआ? शकीरा, 221, एक दिन में। कोई आइडिया नहीं। फिर पता चला कि icq.com पर इमेज सेक्सन में शकीरा सर्च करने पर मेरा सपना में डाली गई एक इमेज आती है। सारे लोग वहीं से आ रहे हैं। खैर आएं देखें।

पहले भारत गोल्बल हुआ, उस गोल्बल भारत में शकीरा आई और अब मेरा सपना गोल्बल हो रहा है। पोस्ट देखें।

आइए बॉस को जाने, साथ में एसपी सिंह को नमन

जून 27, 2007

एक बहुत पोपुलर टीवी विज्ञापन है। हरि साडू वाला। एच फार हिटलर..। याद आ गया। क्या बॉस का सही रूप यही है। बॉस, हर कोई त्रस्त रहता है। चाहे वह सरकारी दफ्तर हो या फिर प्राइवेट।

दफ्तर में बॉस एक होते हैं लेकिन हर कर्मचारी अपने से ठीक ऊपर वाले बॉस (सीनियर) से परेशान होता है। अपने सहकर्मी को तमाम तरीके के कमेंट देता रहता है, बॉस को लेकर। यार ऐसा है, वैसा है लेकिन एक बात है .. जानकार आदमी है। (जानकार नहीं होता तो वहां थोड़े ही बैठा होता)

लोगों की कोशिश होती है कि वह बॉस का जन्मदिन जाने और उसे शुभकामनाएं दे। सबसे पहले। इसे कहते हैं चाटुकारिता नीति।

बॉस और कर्मचारी विक्रम और बैताल की तरह से हैं। कर्मचारी हमेशा भागना चाहता है लेकिन ‘विक्रम’ हमेशा कर्मचारी को पकड़ लेता है। पूरी कहानी सुनता है। जवाब देता है और कर्मचारी फिर गोली देकर भाग निकलता है।

ऐसा नहीं है कि ‘विक्रम’ को नहीं पता कि बैताल भाग जाएगा। फिर भी वह उसे भागने के लिए एक-दो मौके दे देता है। आज का विक्रम पहले से कहीं ज्यादा चतुर और चालाक है।

बॉस को भी कर्मचारियों की गतिविधि जानने के लिए एक चाटुकार की जरूरत होती है। चाहे जो भी मिल जाए। समझदार बैताल या नासमझ बैताल। कहानी तो सुनाएगा ही।

लेकिन कई बॉस टीम में काम करने पर विश्वास रखते हैं। जैसे सुरेंद्र प्रताप सिंह, एसपी। आज उनके शिष्य सभी मीडिया संस्थाओं के मुखिया बन बैठे हैं लेकिन कोई अपने जैसा शिष्य नहीं बना पा रहा है। आज एसपी की दसवीं पुण्यतिथि है। उनको मेरा नमन।

मैंने यह लेख उनको याद करते हुए ही लिखा। आज जनसत्ता और अमर उजाला के संपादकीय पृष्ठ पर उनके बारे में विस्तार से लिखा है। अगर संभव हो तो पत्रकार ब्लागर पढ़ लें।

एक और स्टोरी मिली है । वेब दुनिया से जरा इसे भी पढ़ लें

क्या सही पहचान है बाल ठाकरे की: एक कार्टून

जून 27, 2007

Bal Thackrey and BJP

बाल ठाकरे किसी ज़माने में कार्टूनिस्ट थे आज उन पर यह कार्टून कितना सही बैठता हैसोलह आने सच, ये भाजपा की नियति है की उसका यह हाल हो रहा है 

यूट्यूब: वंदे मातरम और उसमे दिए गए कमेंट

जून 24, 2007

रविवार का दिन, काम का दवाब कम होता है । यूट्यूब खोल विडो देखने लगाइस विडो को देख मेरा रोम रोम रोमांचित हो जाता हैसोचा आज इसे अपने ब्लोग पर भी दाल दूजरा इस विडो पर दिए गए 96 कमेंट पर भी नजर डालिये