Archive for the ‘Internet’ Category

मेरा सपना को 50000 लोगो ने सहलाया

नवम्बर 2, 2007

आज मैं खुश हू. जब मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया था टू कुछ सोच के नही शुरू किया था. लिखने पढने की आदत ने ब्लॉग बना दिया और लिखता गया. आज इसका हिट काउंटर 50000 के पार हो गया. जो कम से कम मुझे तो हतप्रभ कर रहा है. इस बीच गूगल का पीआर रैंक भी 4 हो गया है. ये सब अच्छी चीजे हैं. लेकिन इंटरनेट को मैं जितना समझ पता ह उसमे यह कंटेंट हमेशा किंग होता है.

इसमे लिखे गए हमे मस्ती और सेक्स चाहिए और शकीरा.. इन दो पोस्ट पर ही केवल ५००० से जायदा हिट मिले हैं. जो मुझे थोड़ा दुखी करता है है. मैं यह नही चाहता की लोग ऐसे कीवर्ड से ब्लॉग पर आए. इसी पोस्ट पर आए लेकिन किसी और कीवोर्ड के साथ, तब मुझे खुशी होगी.

खैर फिलहाल तो मैं अब अपने दुसरे ब्लॉग राजेश रोशन डॉट कॉम पर लिखता हू. जिसपर मैंने हिट काउंटर नही लगाया हुआ है. क्योंकि ब्लॉग के अच्छे होने या न होने का यह कोई पैमाना नही है. तो मेरे दोस्तो लिखते रहिये अच्छा लिखिए. हिट पाने के लिए मत लिखिए. अच्छा लिखेंगे हिट आपको ख़ुद ब ख़ुद मिलेंगे. 🙂

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चिट्ठा चोर या ‘भूखा’ चिट्ठेकार

अगस्त 20, 2007

देखने का नजरिया अलग है। किसी ने अगर आलोक पुराणिक जी के चिट्ठे से दो पोस्ट हू बहू कापी कर अपने चिट्ठे में डाल दिया तो क्या वह चोर हो गया? आप कहते होंगे, मैं उसे नहीं मानता। मैं उसे उसकी भूख मानता हूं।

आइडेंटिटी क्राइसिस की भूख। वह अच्छा लिखना नहीं जानता। क्रिएटिविटि नहीं है उसके पास। तो क्या करे! हम आप जो लिखते हैं उसका विचार हम अपने आस पास से लेते हैं। कोई कहीं के लिखे हुए एक लाईन से ही पूरी पोस्ट लिख देता है। कोई कुछ करता है तो कोई कुछ।

अभी कुछ दिन पहले मुझे एक चिट्ठेकार ने एक लिंक देकर यह बताया गया कि इस चिट्ठेकार ने कईयों की पोस्ट को अपने नाम से पब्लिश कर दी है। मैंने कहा यह तो बड़ी अच्छी बात है। मुफ्त में प्रचार हो रहा है। हां, वो अलग बात है कि आपका नाम नहीं दिया गया है। कोई बात नहीं। आपको पढ़ने वाले आपकी लेखनी को जानते हैं। नाहक आप परेशान ना होईए।

उन्होंने कहा कि यह तो गलत बात है कि बिना नाम दिए उसने यह सब काम कर दिया। मैंने कहा गलत तो है लेकिन आप कुछ कर नहीं सकते। और करना भी नहीं चाहिए। तब तक जब तक वह आपका प्रतियोगी ना बन जाए।

आपका लिखा हुआ पोस्ट अगर कोई दूसरा पब्लिश करता है तो वह बेचारा ‘भूखा’ है। आपने उसे खाना दिया है। ठीक है कि वह आपका नाम नहीं ले रहा है, लेकिन दिया आपने ही है। जिसे सब लोग जानते हैं।

इसलिए शोर मत मचाइए, भूखे को खाना देना पुण्य की बात है। खुश हो जाइए। इसमें आपका कोई नुकसान नहीं हो रहा है।

नोट: (आलोक पुराणिक जी का नाम मात्र उदाहरण के लिए दिया गया है)

चिट्ठा चोर या ‘भूखा’ चिट्ठेकार

अगस्त 20, 2007

देखने का नजरिया अलग है। किसी ने अगर आलोक पुराणिक जी के चिट्ठे से दो पोस्ट हू बहू कापी कर अपने चिट्ठे में डाल दिया तो क्या वह चोर हो गया? आप कहते होंगे, मैं उसे नहीं मानता। मैं उसे उसकी भूख मानता हूं।

आइडेंटिटी क्राइसिस की भूख। वह अच्छा लिखना नहीं जानता। क्रिएटिविटि नहीं है उसके पास। तो क्या करे! हम आप जो लिखते हैं उसका विचार हम अपने आस पास से लेते हैं। कोई कहीं के लिखे हुए एक लाईन से ही पूरी पोस्ट लिख देता है। कोई कुछ करता है तो कोई कुछ।

अभी कुछ दिन पहले मुझे एक चिट्ठेकार ने एक लिंक देकर यह बताया गया कि इस चिट्ठेकार ने कईयों की पोस्ट को अपने नाम से पब्लिश कर दी है। मैंने कहा यह तो बड़ी अच्छी बात है। मुफ्त में प्रचार हो रहा है। हां, वो अलग बात है कि आपका नाम नहीं दिया गया है। कोई बात नहीं। आपको पढ़ने वाले आपकी लेखनी को जानते हैं। नाहक आप परेशान ना होईए।

उन्होंने कहा कि यह तो गलत बात है कि बिना नाम दिए उसने यह सब काम कर दिया। मैंने कहा गलत तो है लेकिन आप कुछ कर नहीं सकते। और करना भी नहीं चाहिए। तब तक जब तक वह आपका प्रतियोगी ना बन जाए।

आपका लिखा हुआ पोस्ट अगर कोई दूसरा पब्लिश करता है तो वह बेचारा ‘भूखा’ है। आपने उसे खाना दिया है। ठीक है कि वह आपका नाम नहीं ले रहा है, लेकिन दिया आपने ही है। जिसे सब लोग जानते हैं।

इसलिए शोर मत मचाइए, भूखे को खाना देना पुण्य की बात है। खुश हो जाइए। इसमें आपका कोई नुकसान नहीं हो रहा है।

नोट: (आलोक पुराणिक जी का नाम मात्र उदाहरण के लिए दिया गया है)

जागरण डॉट काम हुआ अब याहू जागरण डॉट काम

अगस्त 11, 2007

यह बताता है कि हिंदी का बाजार बढ़ रहा है। दैनिक जागरण ने बाजार को बताया कि हिंदी भी अपना बाजार कायम कर सकता है। पहले अखबार के जरिए। दैनिक जागरण विश्व का सबसे अधिक पढ़ा जाने वाला अखबार है। और अब इंटरनेट के जरिए। हिंदी का पाठक जागरण डाट काम से वाकिफ है। अब यह दैनिक जागरण और याहू दोनों के संयुक्त प्रयास से चलेगा।

याहू का किसी हिंदी न्यूज पोर्टल के साथ गठजोड़ यह बताने के लिए काफी है कि हिंदी का बाजार कितनी तेजी से बढ़ रहा है। दैनिक जागरण का उदय 1997 में हुआ था। अपने निर्माण के दस साल बाद इसने जो मुकाम हासिल किया है, उसे छू पाना इसके प्रतियोगियों के लिए काफी मुश्किल है।

फिलहाल इसका बीटा वर्जन लांच किया गया है। साथ ही इसका पुराना वर्जन भी चल रहा है, जो धीरे-धीरे हट जाएगा। तो हम अब हम अपने जागरण को अब नए रूप में देख सकते हैं।

जागरण-याहू बीटा वर्जन

‘मेरा भारत परेशान’ से ‘मेरा भारत महान’ तक

अगस्त 5, 2007

भारत के आम नागरिकों की राय है यह। कोई भारत से परेशान है तो कोई भारत को महान कहता है। आम भारतीय वर्तमान में जीता है। इन्हें भूत और भविष्य से कोई मतलब नहीं। हड़ताल में यह परेशान होता है। और ज्यादा मजदूरी मिलने पर खुश हो जाता है।

आज का भारत 60 साल का नौजवान भारत है। इसकी रफ्तार से हर कोई अचंभित है। देशी विदेशी सभी इसके तारीफ कर रहे हैं। अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर भारत से ज्यादा उत्सुक है।

टाइम ने अपने वर्तमान अंक में भारत की तारीफ की है। आजादी के 60 साल पूरे होने पर टाइम ने भारत पर विशेषांक प्रकाशित किया है। टाइम से पहले कई और विदेशी अखबारों और चैनलों ने भारत की ओर नजरें इनायत की हैं (इसे देख लें)

मेगास्थनीज, इब्नबतूता, फाहियान, ह्वेन स्वांग ने भारत की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं। सभी भारत की ओर ही ताक रहें हैं। विकिपिडिया पर किसी देश के पेज को पढ़ने में अमेरिका के बाद भारत के पेज का नंबर है। भारत और भारत की चीजें आज विश्व भर में लोकप्रिय हो रहीं हैं। लंदन में पनीर टिक्का की बिक्री बर्गर के करीब-करीब है। विदेशी महिलाओं को साड़ी में काफी पसंद है।

आज से बीस साल पहले टाटा और बिड़ला भारत में भारत के सबसे बड़े ब्रांड एंबेस्डर थे। टाटा-बिड़ला सभी के जुबान पर थे। यही हाल आज पूरे विश्व का है। आईटी, स्टील, फिल्म और साहित्य में भारत का परचम अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और खाड़ी देशों पर लहरा रहा है।

कोरस को खरीदने की भारी भरकम डील की खबर हो या अरुंधति राय व अनिता देसाई को बुकर पुरस्कार मिलने की खबर। हम आगे बढ़ रहे हैं। धीरे-धीरे। सपेरों के देश से अमीरों के देश बनने की कहानी भी दुनिया वाले आंखें फाड़-फाड़ कर देख और पढ़ रहे हैं। विदेशियों की रुचि पौराणिक योग में भी बढ़ी है।

क्रमश:

‘मेरा भारत परेशान’ से ‘मेरा भारत महान’ तक

अगस्त 5, 2007

भारत के आम नागरिकों की राय है यह। कोई भारत से परेशान है तो कोई भारत को महान कहता है। आम भारतीय वर्तमान में जीता है। इन्हें भूत और भविष्य से कोई मतलब नहीं। हड़ताल में यह परेशान होता है। और ज्यादा मजदूरी मिलने पर खुश हो जाता है।

आज का भारत 60 साल का नौजवान भारत है। इसकी रफ्तार से हर कोई अचंभित है। देशी विदेशी सभी इसके तारीफ कर रहे हैं। अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर भारत से ज्यादा उत्सुक है।

टाइम ने अपने वर्तमान अंक में भारत की तारीफ की है। आजादी के 60 साल पूरे होने पर टाइम ने भारत पर विशेषांक प्रकाशित किया है। टाइम से पहले कई और विदेशी अखबारों और चैनलों ने भारत की ओर नजरें इनायत की हैं (इसे देख लें)

मेगास्थनीज, इब्नबतूता, फाहियान, ह्वेन स्वांग ने भारत की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं। सभी भारत की ओर ही ताक रहें हैं। विकिपिडिया पर किसी देश के पेज को पढ़ने में अमेरिका के बाद भारत के पेज का नंबर है। भारत और भारत की चीजें आज विश्व भर में लोकप्रिय हो रहीं हैं। लंदन में पनीर टिक्का की बिक्री बर्गर के करीब-करीब है। विदेशी महिलाओं को साड़ी में काफी पसंद है।

आज से बीस साल पहले टाटा और बिड़ला भारत में भारत के सबसे बड़े ब्रांड एंबेस्डर थे। टाटा-बिड़ला सभी के जुबान पर थे। यही हाल आज पूरे विश्व का है। आईटी, स्टील, फिल्म और साहित्य में भारत का परचम अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और खाड़ी देशों पर लहरा रहा है।

कोरस को खरीदने की भारी भरकम डील की खबर हो या अरुंधति राय व अनिता देसाई को बुकर पुरस्कार मिलने की खबर। हम आगे बढ़ रहे हैं। धीरे-धीरे। सपेरों के देश से अमीरों के देश बनने की कहानी भी दुनिया वाले आंखें फाड़-फाड़ कर देख और पढ़ रहे हैं। विदेशियों की रुचि पौराणिक योग में भी बढ़ी है।

क्रमश:

चौंकाने वाले आंकड़े!

अगस्त 4, 2007

लिखने पढ़ने की आदत ने पहले पत्रकार बनाया और अब ब्लागर। इन दोनों मामलों में मैं अभी नया हूं। पत्रकारिता करते हुए महज दो साल हुए हैं। ब्लागिंग करते हुए 7 महीने।

आज एक लिंक ने मेरा बरबस मन खींच लिया। वर्डप्रेस पर रोजाना ब्लाग की रैंकिंग की जाती है। वहां की लिंक से आज की तारीख में मेरा सपना में कुल दो लोग आए। तो मुझे पता चला कि वर्डप्रेस पर बने ब्लागस पर मेरा सपना 67वें नंबर पर है।

अंग्रेजी के बीच हिंदी के दो ब्लाग टाप 100 में हैं। अमित जी का ‘दुनिया मेरी नजर से’ से 71वें नंबर पर है। इंटरनेट के बारे में जो मेरी जानकारी है वह कहती है कि ‘कंटेंट इज किंग’।

अगर आपके पास अच्छा कंटेंट है और इंटरनेट के दांव पेंच को थोड़ा बहुत भी जानते हों तो आप ही राजा हैं। आप लोगों के लिए मेरा सपना पर प्रतिदिन आने वाले लोगों का एक ग्राफ।

blog visitors

लिखिए और मस्त लिखिए। मुझे पूरा विश्वास है आने वाला समय हम हिंदी वालों का ही है।

मेरा एक दोस्त मुझे इन सब को देखकर कह रहा है कि अपने मुंह मियां मिठ्ठू बनना। मैंने उसकी बात को सही मान ली। आप भी ऐसा कह सकते हैं। लेकिन मैं सच बताऊं मैं आत्ममुग्ध कम होता हूं।

आह! ये इंटरनेट ‘यारी’ से परेशान हो गया हूं

अगस्त 3, 2007

ऐसा लगता है जैसे ‘यारी’ की बाढ़ आ गई है। पिछले सात दिनों में मुझे ‘यारी’ सोशल नेटवर्किग साइट की ओर से कुल 23 लोगों ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया। मैं आकरुट पर रजिस्टर हूं। वहां से मुझे एक सीख मिली। सोशल नेटवर्किग साइट्स से जितना फायदा नहीं है उससे कहीं ज्यादा घाटा मुझे दिखता है।

आकरुट को मैं कॉपी-पेस्ट की दुनिया कहता हूं। यहां एक की कापी मारकर दूसरे को चिपका दिया जाता है। यारी से पहले ‘टैग्गड’ ने भी मुझे परेशान किया था। मुमकिन है आप लोगों को भी..।

यह इंटरनेट की दुनिया है यारों, जरा बच के। इस दुनिया की खास बात यह है कि यहां अच्छी चीजें कम, बुरी चीजें ज्यादा मिलती हैं। आपको संभल कर अच्छी चीजों को उठाना होगा। भीड़ को देखकर आप भी उनके साथ ना हो लें।

आह! ये इंटरनेट ‘यारी’ से परेशान हो गया हूं

अगस्त 3, 2007

ऐसा लगता है जैसे ‘यारी’ की बाढ़ आ गई है। पिछले सात दिनों में मुझे ‘यारी’ सोशल नेटवर्किग साइट की ओर से कुल 23 लोगों ने दोस्ती का हाथ बढ़ाया। मैं आकरुट पर रजिस्टर हूं। वहां से मुझे एक सीख मिली। सोशल नेटवर्किग साइट्स से जितना फायदा नहीं है उससे कहीं ज्यादा घाटा मुझे दिखता है।

आकरुट को मैं कॉपी-पेस्ट की दुनिया कहता हूं। यहां एक की कापी मारकर दूसरे को चिपका दिया जाता है। यारी से पहले ‘टैग्गड’ ने भी मुझे परेशान किया था। मुमकिन है आप लोगों को भी..।

यह इंटरनेट की दुनिया है यारों, जरा बच के। इस दुनिया की खास बात यह है कि यहां अच्छी चीजें कम, बुरी चीजें ज्यादा मिलती हैं। आपको संभल कर अच्छी चीजों को उठाना होगा। भीड़ को देखकर आप भी उनके साथ ना हो लें।

कमेंट डालने पर ताला मत लगाईए

जुलाई 22, 2007

लोगों को इसके बारे में पता तो होगा ही। अभी-अभी मैंने किसी पोस्ट पर कमेंट दिया और वो कहता है कि बाद अप्रूवल मिलने के बाद कमेंट को अपलोड किया जाएगा। क्यों?? कुछ समझ नहीं आया।

लोग अपने घर में ताला लगा कर रखते हैं कि कोई गलत आदमी प्रवेश ना करे। कुछ चुरा के कोई ना ले जाए। आप कहीं गालियों से डर कर तो यह मोडरेशन नहीं लगा रखा है? अगर हां तो एक बात बता दूं, आप सभी लोगों को कि आप जब किसी के बारे में कुछ बोलते हैं तो आप उस शख्स से कहीं ज्यादा अपने बारे में बता रहें होते हैं कि आप कौन और क्या हैं।

इसलिए डरना छोड़िए आटो अप्रूवल को ऑन कर दीजिए। अगर किसी को तकनीकी परेशानी हो तो श्रीश जी आपकी मदद के लिए हमेशा तैयार हैं। यह मैंने उनसे बिना पूछे लिखा है क्योंकि मुझे उनके बारे में जो पता है वह यह बताती है कि श्रीश जी चिट्ठेकारों के मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।