Archive for the ‘Politics’ Category

विश्वास कीजिये अंधविश्वास नही; तहलका के स्टिंग के मुतालिक

अक्टूबर 26, 2007

सभी की अपनी अलग विचारधारा होती है. मुमकिन है पुत्र के विचार पिता से न मिले और ये भी देखा गया है की पुत्र पिता का अंधभक्त होता है. सबके अपने विचार हैं और वही उनकी विचारधारा बनाती है. तहलका ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया; ऑपरेशन कलंक. अभी ये आया ही था की मेरे ऑफिस के मेरे सहयोगियों के तरफ़ से कई सारी प्रतिक्रियाये आने लगी. अब ये हो जाएगा, अब वो हो जाएगा. कुछ के शब्द दूसरो के शब्दों से टकराने लगे. माहौल गर्म हो रहा था.  ब्लोग्गिंग में भी यही हो रहा है. एक के पोस्ट दूसरे के पोस्ट से टकरा रहे हैं, तो कही कमेंट से कमेंट.

मुद्दे की बात यह है की आप आंखो देखी पर विश्वास कीजिये. किसी भी चीज पर अंधविश्वास मत कीजिये. अन्धविश्वास वो करते हैं जो पढे लिखे नही होते हैं. और माशाल्लाहा हम लोग तो पढे लिखे लोग हैं. बाकि आप लोग बेहतर समझ सकते हैं. ये राजनीति के दावपेंच हैं या अगर आप अंधविश्वास करेंगे तो किसी दिन आप उसमे ख़ुद फंस सकते हैं.
Democracy is a daily excercise. लोकतंत्र को बनने में हर रोज मेहनत करनी पड़ती है

indian flag enblem

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‘मेरा भारत परेशान’ से ‘मेरा भारत महान’ तक

अगस्त 5, 2007

भारत के आम नागरिकों की राय है यह। कोई भारत से परेशान है तो कोई भारत को महान कहता है। आम भारतीय वर्तमान में जीता है। इन्हें भूत और भविष्य से कोई मतलब नहीं। हड़ताल में यह परेशान होता है। और ज्यादा मजदूरी मिलने पर खुश हो जाता है।

आज का भारत 60 साल का नौजवान भारत है। इसकी रफ्तार से हर कोई अचंभित है। देशी विदेशी सभी इसके तारीफ कर रहे हैं। अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर भारत से ज्यादा उत्सुक है।

टाइम ने अपने वर्तमान अंक में भारत की तारीफ की है। आजादी के 60 साल पूरे होने पर टाइम ने भारत पर विशेषांक प्रकाशित किया है। टाइम से पहले कई और विदेशी अखबारों और चैनलों ने भारत की ओर नजरें इनायत की हैं (इसे देख लें)

मेगास्थनीज, इब्नबतूता, फाहियान, ह्वेन स्वांग ने भारत की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं। सभी भारत की ओर ही ताक रहें हैं। विकिपिडिया पर किसी देश के पेज को पढ़ने में अमेरिका के बाद भारत के पेज का नंबर है। भारत और भारत की चीजें आज विश्व भर में लोकप्रिय हो रहीं हैं। लंदन में पनीर टिक्का की बिक्री बर्गर के करीब-करीब है। विदेशी महिलाओं को साड़ी में काफी पसंद है।

आज से बीस साल पहले टाटा और बिड़ला भारत में भारत के सबसे बड़े ब्रांड एंबेस्डर थे। टाटा-बिड़ला सभी के जुबान पर थे। यही हाल आज पूरे विश्व का है। आईटी, स्टील, फिल्म और साहित्य में भारत का परचम अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और खाड़ी देशों पर लहरा रहा है।

कोरस को खरीदने की भारी भरकम डील की खबर हो या अरुंधति राय व अनिता देसाई को बुकर पुरस्कार मिलने की खबर। हम आगे बढ़ रहे हैं। धीरे-धीरे। सपेरों के देश से अमीरों के देश बनने की कहानी भी दुनिया वाले आंखें फाड़-फाड़ कर देख और पढ़ रहे हैं। विदेशियों की रुचि पौराणिक योग में भी बढ़ी है।

क्रमश:

‘मेरा भारत परेशान’ से ‘मेरा भारत महान’ तक

अगस्त 5, 2007

भारत के आम नागरिकों की राय है यह। कोई भारत से परेशान है तो कोई भारत को महान कहता है। आम भारतीय वर्तमान में जीता है। इन्हें भूत और भविष्य से कोई मतलब नहीं। हड़ताल में यह परेशान होता है। और ज्यादा मजदूरी मिलने पर खुश हो जाता है।

आज का भारत 60 साल का नौजवान भारत है। इसकी रफ्तार से हर कोई अचंभित है। देशी विदेशी सभी इसके तारीफ कर रहे हैं। अमेरिका परमाणु समझौते को लेकर भारत से ज्यादा उत्सुक है।

टाइम ने अपने वर्तमान अंक में भारत की तारीफ की है। आजादी के 60 साल पूरे होने पर टाइम ने भारत पर विशेषांक प्रकाशित किया है। टाइम से पहले कई और विदेशी अखबारों और चैनलों ने भारत की ओर नजरें इनायत की हैं (इसे देख लें)

मेगास्थनीज, इब्नबतूता, फाहियान, ह्वेन स्वांग ने भारत की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं। सभी भारत की ओर ही ताक रहें हैं। विकिपिडिया पर किसी देश के पेज को पढ़ने में अमेरिका के बाद भारत के पेज का नंबर है। भारत और भारत की चीजें आज विश्व भर में लोकप्रिय हो रहीं हैं। लंदन में पनीर टिक्का की बिक्री बर्गर के करीब-करीब है। विदेशी महिलाओं को साड़ी में काफी पसंद है।

आज से बीस साल पहले टाटा और बिड़ला भारत में भारत के सबसे बड़े ब्रांड एंबेस्डर थे। टाटा-बिड़ला सभी के जुबान पर थे। यही हाल आज पूरे विश्व का है। आईटी, स्टील, फिल्म और साहित्य में भारत का परचम अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और खाड़ी देशों पर लहरा रहा है।

कोरस को खरीदने की भारी भरकम डील की खबर हो या अरुंधति राय व अनिता देसाई को बुकर पुरस्कार मिलने की खबर। हम आगे बढ़ रहे हैं। धीरे-धीरे। सपेरों के देश से अमीरों के देश बनने की कहानी भी दुनिया वाले आंखें फाड़-फाड़ कर देख और पढ़ रहे हैं। विदेशियों की रुचि पौराणिक योग में भी बढ़ी है।

क्रमश:

मुफ्त मिलने वाली चीजें मुफ्त नहीं मिलती

जुलाई 25, 2007

भारत की अजीब बनावट का ही कमाल है कि यहां मुफ्त में मिलने वाली चीजें मुफ्त नहीं मिलती हैं। एफआईआर कराने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। कोई जरूरी नहीं कि पैसे देने के बाद भी आपकी एफआईआर लिख ली जाए।

हम आप सभी के साथ ऐसा हुआ होगा। सरकारी काम कराने के लिए आपको बख्शीश देनी होती है। यह बख्शीश नहीं घूस होती है। ब्राइब। पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड। आपको अधिकारी से लेकर पुलिस वाले को पैसा देना ही पड़ता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कल अपने एक आदेश में कहा है कि राज्य यह सुनिश्चित करे कि लोगों के एफआईआर लिखे जाए। रविवार रात दिलवालों की नगरी दिल्ली में कुछ 40-50 लड़कों की टोली ने उत्पात मचाया, जिसका कोई एफआईआर नहीं लिखा गया। यह है दिल्ली पुलिस, विथ यू, फार यू, आलवेज।

सुप्रीम कोर्ट के जज बीएन अग्रवाल ने अपना अनुभव बताया। कहा मेरी पत्नी और बेटी किसी मामले में पुलिस स्टेशन एफआईआर लिखाने गए थे जिसे लिखने में दो-तीन घंटे का समय लग गया। अगर सुप्रीम कोर्ट के जज साथ ऐसा हो सकता है तो आप अनुमान लगा सकते हैं।

आरटीआई इसका इलाज है। लोग आरटीआई को ही नहीं जानते।

क्या आप भी नही जानते ?

आईडेंटिटी क्राइसिस: राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों से एक मुलाकात

जुलाई 2, 2007

स्कूल में सबको पढ़ाया बताया जाता रहा कि बड़ा सपना देखो, बड़े बनोगे। लेकिन सुनता ही कोई नहीं। मैं सुनता था सो मैंने मेरा सपना नाम से ब्लाग बना लिया और जो मुझसे भी बड़ा सपना देखते थे उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन भर दिया। एक नजर..

वकील, दर्जी, बढ़ई, बीमा एजेंट सब के सब लगे पड़े हैं राष्ट्रपति बनने के लिए। अपनी कमाई का 15 हजार भी उन्होंने नामांकन शुल्क भी भर दिया है। कोई भ्रष्टाचार दूर करने के लिए राष्ट्रपति बनना चाहता है तो कोई अफजल को फांसी देने के लिए।

दिल्ली के एक सज्जन हैं तीन बार स्नातकोत्तर कर चुके हैं। एलएलबी की भी डिग्री है। कांग्रेस और भाजपा दोनों को पूंजीवादी पार्टी मानते हैं। पिछली बार इनका नामांकन वैध नहीं पाया गया था और इस बार भी नामांकन वैध नहीं पाया गया है।

राष्ट्रपति बनने के लिए 84 लोगों ने नामांकन भरा था लेकिन अफसोस 82 लोगों के नामांकन वैध नहीं पाये जाने से रद्द कर दिया गया है। क्या यह सारे लोग सनकी हैं। पता नहीं शायद ऊंचा ख्वाब और अपनी पहचान के लिए तरसते हैं। इनको पहचान चाहिए। आईटेंटिटी क्राइसिस।

क्या सही पहचान है बाल ठाकरे की: एक कार्टून

जून 27, 2007

Bal Thackrey and BJP

बाल ठाकरे किसी ज़माने में कार्टूनिस्ट थे आज उन पर यह कार्टून कितना सही बैठता हैसोलह आने सच, ये भाजपा की नियति है की उसका यह हाल हो रहा है 

ग्लोबलाइजेशन, नौजवान भारतीय और परिवार

जून 25, 2007

कल तक सचिन को लोग सचिन के नाम से ही जानते थे। उसका कोई पुकारू नाम भी नहीं था। आज सचिन स्वयं लोगों को अपना ‘जॉन केली’ बताता है। सचिन गुड़गांव के एक काल सेंटर में काम करता है। उम्र 21 साल। पिता ‘म्यूनिसिपल कोरपोरेशन आफ दिल्ली’ (एमसीडी) में काम करते हैं। जितनी सैलरी पिता को मिलती है उससे 3 हजार ज्यादा सचिन कमाता है। उनके पिता पूर्वी उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से हैं। सचिन का जन्म दिल्ली में ही हुआ है।

(यह एक प्लाट है। जो मैं रोज देखता हूं। मैंने सोचा कि कुछ लिखूं और आज लिख रहा हूं। सारे किरदार काल्पनिक हैं)

आज के नैसर्गिक गुणों वाले हमारे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 1993 में जो बजट पेश किया उसका प्रभाव आज पित्जा हट, न्यूमरो यूनो, मैक डोनाल्ड, कैंटा बिल व अन्य ब्राडों के रूप में हमारे सामने है।

सचिन को पित्जा हट का पित्जा नहीं पसंद है। उसे जब भी पित्जा खाने की इच्छा होती है वह डोमिनोज से पित्जा को आर्डर देता है। शौक से वह कुर्ता पहनता है लेकिन ब्रांडेड। साथ में लिवाइस का डेनिम। लोगों से मिलने पर हाई और जाने पर सि या कहता है।

यह सब चीजें उसने ना तो स्कूल-कालेज में सीखी हैं और ना ही घर में। जिस कंपनी में वह काम करता है वहां का माहौल उसे यह सब सिखा रहा है।

भारत में 25 से 35 साल के उम्र की आबादी का हिस्सा 53 फीसदी है। इसका मतलब की आधी से ज्यादा जनसंख्या युवा है।

अब सचिन डेटिंग के लिए जाता है। लेकिन छुप-छुप कर। आज भी भारत में प्यार को सार्वजनिक रूप में कहने से लोग हिचकते हैं। वीकेंड कल्चर ने लोगों के मस्ती करने का ढंग बदला है। पहले लोग घर में कैरम बोर्ड और सांप-सीढ़ी खेलते हैं और आज कोंट्रा-मारियो के एडवांस्ड वर्जन बाजार में मौजूद हैं। फिर हर दस किलोमीटर में एक मल्टीप्लेक्स।

पूजा के नाम पर महिलाएं अपने घरों में बने मंदिर में पूजा करतीं हैं। या फिर अपनी सैंट्रो कार और लकदक साड़ी में सजकर मंगलवार शाम को अक्षरधाम मंदिर में जाती है।

इस ग्लोबलाइजेशन ना जाने कितने डे (दिवस) बना दिए। इसका श्रेय जितना यश चोपड़ा को जाता है उतना ही प्रधानमंत्री को भी जो कभी वित्त मंत्री थे।

शशि कपूर का एक फेमस डायलग है। ‘मेरे पास मां है।’ तो पहले मदर्स डे आया है। लेकिन अब फादर्स डे भी कतार में खड़ा है। रोज डे, वैलेंटाइंस डे ने ग्लोबलाइजेशन में बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद और शिव सेना को भी लाइम लाइट में ला दिया। हमारे देश में खजुराहो और अजंता-एलोरा बहुत पहले से हैं। इस पर यह शान बघारते हैं और वैलेंटाइंस डे पर डंडा।

किसी ने कहा है कि जहां भी संस्कृति का क्षरण हो रहा हो तो समझो कि वहां विकास आने वाला है। भारत भी विकसित राष्ट्र बनने वाला है।

इस लेख से कोई भी असहमत हो सकता है। असहमत होने वालों से दो बातें कहूंगा। पहला कि आप कभी गुड़गांव और नोएडा के इन कॉल सेंटरों के चक्कर लगाएं दूसरा कि अगर आप वहीं काम करते हैं और असहमत हैं तो Exception is Everywhere

यूपी सीपीएमटी और तीसरा मोर्चा : एक कार्टून

जून 23, 2007

UP CPMT and third front

आपसी मंत्रणा चल रही है कि कैसे जीता जायेइस कार्टून को देख कर वो चुटकुला याद गया कि मैं कोई भी मैच जीत सकता हु केवल मुझे पाकिस्तानी UMPIRE दे दीजिए 🙂  🙂  🙂

30 साल का हुआ लाल झंडा

जून 22, 2007

CPI flag

हमारे देश के अच्छे राष्ट्रपति कलाम ने एक बार कहा कि भारत में द्विदलीय प्रणाली होनी चाहिए। ये हल्ला, वो हल्ला। शिवसेना ने इस पर कुछ नहीं बोला। लेकिन जो आज उन्हें दूसरी पारी के लिए सबसे उपयुक्त बता रहे हैं, उन्होंने उनकी भद्द कर दी थी।

खैर भारत के दो सबसे बड़े राजनीतिक दलों की बात करें तो उन्होंने जो भारत को दिया है वह सब जानते हैं। 60 साल के जवान भारत में इतने घोटाले हो गए कि भारत ‘सपेरों के देश’ से ‘घोटालों का देश’ बन गया। इसके बाद तो स्टिंग आपरेशनों का ऐसा दौर चला कि क्या कांग्रेस, भाजपा, राजद, राजग.. सब के सब एक ही प्लेटफार्म में खड़े थे। हर नेता डूब जाना चाहता है, आकंठ तक, पैसे के।

इस बीच लाल झंडा पिछले 30 सालों से एक छत पर लहरा रहा है, जो अब तक नहीं उतरा। एक बार को लगा कि शायद अब लोगों की तंद्राएं टूटेंगीं लेकिन फिर से लाल झंडे को पूर्ण बहुमत। बाद में पता चला कि वह तंद्रा नहीं थी। पश्चिम बंगाल के लोग जागते रहते हैं।

राजनीति में विपक्षी पार्टी का चुनाव में हारने के बाद एक जुमला काफी फेमस है, ‘चुनाव में भारी गड़बड़ी हुई है।’ मुझे इसपर हंसी आती है।

इन सभी के बीच इन वामपंथियों का जो एक चेहरा बराबर बना रहा है वह है विरोध का। जिस प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का इन लाल खेमावालों ने विरोध किया उस मामले में पश्चिम बंगाल देश में चौथे स्थान पर है। लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब के आधार पर। तो फिर का ढोंग कैसा?

किसी साक्षात्कार में बुद्धदेब चटर्जी ने कहा कि जिस हर्बल हब को बंगाल सरकार ने हासिल किया है उसे लेने के लिए पांच राज्यों की सरकार लगी थी। हमें मिला, यह हमारे लिए एक जीत है।

खैर, इनसब के बीच बंगाल में सरकार अपने तीस साल की उपलब्धियां गिना रहीं है और विरोधी अपना दायित्व उनका विरोध कर निबाह रहे हैं। लेकिन बंगाल में लाल झंडा बड़ी शान से लहरा रहा है और उसकी लहर दिल्ली तक पहुंची है।

राष्ट्रपति पद: इस से बढिया कार्टून हो नही सकता

जून 16, 2007

President cartoon

राष्ट्रपति पद को भी  राजनेताओ ने बन्दर बाँट बाना दिया है