Archive for the ‘Sex’ Category

मेरा सपना को 50000 लोगो ने सहलाया

नवम्बर 2, 2007

आज मैं खुश हू. जब मैंने ब्लॉग लिखना शुरू किया था टू कुछ सोच के नही शुरू किया था. लिखने पढने की आदत ने ब्लॉग बना दिया और लिखता गया. आज इसका हिट काउंटर 50000 के पार हो गया. जो कम से कम मुझे तो हतप्रभ कर रहा है. इस बीच गूगल का पीआर रैंक भी 4 हो गया है. ये सब अच्छी चीजे हैं. लेकिन इंटरनेट को मैं जितना समझ पता ह उसमे यह कंटेंट हमेशा किंग होता है.

इसमे लिखे गए हमे मस्ती और सेक्स चाहिए और शकीरा.. इन दो पोस्ट पर ही केवल ५००० से जायदा हिट मिले हैं. जो मुझे थोड़ा दुखी करता है है. मैं यह नही चाहता की लोग ऐसे कीवर्ड से ब्लॉग पर आए. इसी पोस्ट पर आए लेकिन किसी और कीवोर्ड के साथ, तब मुझे खुशी होगी.

खैर फिलहाल तो मैं अब अपने दुसरे ब्लॉग राजेश रोशन डॉट कॉम पर लिखता हू. जिसपर मैंने हिट काउंटर नही लगाया हुआ है. क्योंकि ब्लॉग के अच्छे होने या न होने का यह कोई पैमाना नही है. तो मेरे दोस्तो लिखते रहिये अच्छा लिखिए. हिट पाने के लिए मत लिखिए. अच्छा लिखेंगे हिट आपको ख़ुद ब ख़ुद मिलेंगे. 🙂

भारत में Gay और Lesbian संस्कृति का हमला

जुलाई 4, 2007

जब मैं यह संस्कृति लिखता हूं इसका मतलब है कि यह हमारे रोज मर्रा की आदतों में शुमार हो रहा है। और यह हमला है या नहीं यह तो आपके देखने का नजरिया बताएगा।

जिनको इस बारे में नहीं पता विकिपिडिया की यह लिंक उनके लिए महत्वपूर्ण है।

आज के फैशन के साथ हर तीसरी फिल्म में गे के बारे में दिखाया जाता है। कोंकणा सेन तो इस खासी परेशान है। पहले पेज थ्री फिर मेट्रो।

मैं शूटआउट एट लोखंडवाला देखने नोएडा के पीवीआर गया था। देखा एक लंबे बालों वाला पुरुष जिसने अपने होठों पर कुछ पहन रखा था। अब उसे कानबाली तो नहीं ही कहेंगे शायद होठबाली भी नहीं। अब यह फैशन की मार है या ..।

नीदरलैंड, बेल्जियम, स्पेन, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका में तो एक लिंग के साथ विवाह को कानूनी मान्यता मिल गई है। कई जगहों पर बहस चल रही है। अमेरिका के मैसाच्चुएट्स में भी इसको कानूनी मान्यता मिली है लेकिन पूरे अमेरिका में इसके लिए लड़ाई लड़ी जा रही है।

अब अगर हम थोड़ा संकुचित सोचे तो यह होगा कि बाहर में क्या हो रहा इससे हमे क्या? लेकिन फैशन तो अब इंटरनेट के माध्यम से भी चल रहा है। और मुमकिन है कि आने वाले कुछ सालों में भारत में भी इसके कानूनी रूप के लिए आवाजें उठेंगी।

हमारे पड़ोसी राष्ट्र पाकिस्तान ने तो ऐसी शादियों को अवैध ठहरा दिया है। भारत में ऐसी शादियां आए दिन मीडिया की जुबानी हम सुनते रहते हैं। लेकिन पता नहीं आज की युवा किस दिन यह सीमा तोड़ेगी और कहेगी हमें चाहिए कानूनी हक। समय का इंतजार कीजिए, यह जल्द ही होगा।

हिन्दू धर्म क्या है: सेक्स या मुक्ति । क्या हम बात कर सकते हैं??

मई 28, 2007

bloमेरे एक करीबी मित्र हैं जो भारत और भारत से जुड़ी अनेक चीजों पर बहुत गर्व करते हैं। मैं भी करता हूं..लेकिन सभी चीजों पर नहीं। खैर, मेरे उस दोस्त को विदेश की कुछ अगर पसंद है तो वह है वहां की फिल्में। जी सिनेमा नहीं जी एमजीएम देखता है। साथ ही स्टार मूवीज और एचबीओ। अब उसके पीछे उसकी मानसिकता मैं नहीं जानता या फिर मौन रहना चाहता हूं।

दोहे तो उसे खूब याद हैं, चौपाई भी। एक घंटे की बातचीत में रामायण, महाभारत के कई प्रसंग सुना देता है। धर्म की बात करने पर हिन्दू को सबसे पुराना धर्म बताते हुए एक श्लोक सुना देता है। बाकी धर्मो के बारे में.. नेक ख्याल तो नहीं रखता है।

हम दोनों सुबह-सुबह CNN पर एक प्रोग्राम देख रहे थे.. Anderson Cooper 360। उस स्पेशल प्रोग्राम में बात हो रही थी ‘ईसाईयत क्या है: सेक्स या मुक्ति।’ मैंने उससे कहा कि ‘हिन्दू धर्म क्या है: सेक्स या मुक्ति’। गुस्से में आकर मुझे ना जाने क्या-क्या बोल बैठा। मैंने कहा क्या मुझे यह प्रश्न पूछने का भी अधिकार नहीं है। उसने कहा तुम जानते क्या हो हिन्दू धर्म के बारे में। टीवी देखकर कुछ भी पूछ देते हो। तो मैंने कहा कि भगवान करे तो लीला और मैं करूं तो सेक्स और भोग।

सीएनएन के इन तीनों प्रोग्राम के स्क्रिप्ट आनलाइन हैं जो यहां देखे जा सकते हैं। क्लिक, क्लिक, क्लिक

मैं यह पूछता हूं कि क्या हमें धर्म के बारे में सीएनएन की रिपोर्ट की तरह नहीं बात करनी चाहिए। क्या पहले जो बातें लिखी गई हैं, उसी को सत्य मानते हुए उसकी पूजा करनी चाहिए। मैं विश्वासी हूं अंधविश्वासी नहीं। चाहे वो मामला धर्म से जुड़ा ही क्यों ना जुड़ा हो।